‘वोट चोरी’ का भूत: राहुल गांधी का निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला, जानिए क्या है पूरा मामला
"वोट चोरी" के आरोप की आग में घी डालते हुए, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले हफ्ते देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त, ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र की जड़ों को खोखला करने वालों को बचाने का संगीन इल्जाम लगाया है। यह बयान उस वक्त आया है जब देश आम चुनावों की दहलीज पर खड़ा है।
कर्नाटक-महाराष्ट्र के आंकड़े: राहुल के आरोपों का आधार
विपक्ष के एक प्रमुख चेहरे के तौर पर, राहुल गांधी ने अपने दावों को पुष्ट करने के लिए कर्नाटक और महाराष्ट्र के दो विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों को सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि इन क्षेत्रों में मतदाताओं के नामों को या तो फर्जी तरीके से हटाया गया है या फिर अनधिकृत रूप से जोड़ा गया है। इन आंकड़ों के हवाले से, उन्होंने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
निर्वाचन आयोग का खंडन: "गलत जानकारी" का आरोप
हालांकि, राहुल गांधी के इन गंभीर आरोपों पर निर्वाचन आयोग ने तुरंत प्रतिक्रिया दी है। आयोग ने इन दावों को "गलत और बेबुनियाद" बताते हुए खारिज कर दिया है। आयोग का कहना है कि राहुल गांधी "गलत जानकारी" फैला रहे हैं, क्योंकि किसी भी आम नागरिक के लिए ऑनलाइन माध्यम से किसी वोट को हटाना संभव नहीं है। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि वोट हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह से विनियमित और पारदर्शी है।
आगे क्या?
यह आरोप-प्रत्यारोप का खेल यहीं नहीं रुकता। जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं, "वोट चोरी" जैसे मुद्दे राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इन आरोपों पर आगे क्या कार्रवाई होती है और निर्वाचन आयोग अपने पक्ष को किस तरह मजबूत करता है।
(यह लेख पीटीआई के इनपुट के साथ तैयार किया गया है।)
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