“यह बंटवारा नहीं, बाजार में लगा सौदा है!” संजय राउत का बागी सांसदों पर तीखा हमला
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मैं इसे पार्टी का बंटवारा नहीं मानता। विचारधारा से जुड़ा व्यक्ति ही असल मायने में दल छोड़ता है। लेकिन जब कोई खुद को बेचने के लिए सरेआम बाजार में खड़ा हो जाए और कोई उसे खरीद ले, तो उसे सौदेबाजी कहते हैं, बंटवारा नहीं। हमारे छह लोग दो दिन पहले बाजार में अपनी कीमत का ‘प्राइस टैग’ लगाकर खड़े थे और अंततः बिक गए। उनके इस फैसले के पीछे कोई महान क्रांतिकारी सोच नहीं, बल्कि सिर्फ स्वार्थ था।”
राउत ने बागी सांसदों—संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे और ओमप्रकाश राजेनिंबालकर—पर कड़ा निशाना साधा। इन सांसदों ने पार्टी के कड़े ‘थ्री-लाइन व्हिप’ की अनदेखी करते हुए दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण संसदीय बैठक से किनारा कर लिया था।
इन छह सांसदों के अब तक मुंबई न लौटने का कारण बताते हुए राउत ने सनसनीखेज आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार में मंत्री पद की मलाई किसे मिलेगी, इसे लेकर इन बागियों के बीच अब अंदरूनी कलह और सिरफुटौवल शुरू हो चुकी है।
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