क्या इंस्टाग्राम आपकी बातें सुनता है? जानिए क्या है हकीकत!
क्या आपने कभी सोचा है कि किसी प्रोडक्ट की बात करते ही उसका विज्ञापन आपके इंस्टाग्राम फीड पर चमकने लगता है? यह किसी जादू से कम नहीं लगता, है ना? सालों से लोगों के मन में यह सवाल घूम रहा है कि क्या इंस्टाग्राम और उसकी पैरेंट कंपनी मेटा, हमारे फोन के माइक्रोफोन से हमारी बातचीत सुनकर हमें विज्ञापन दिखाती है। लेकिन अब इंस्टाग्राम के चीफ एडम मोसेरी ने इस रहस्य से पर्दा उठाया है और इसे महज एक ‘मिथक’ करार दिया है। वे यकीन दिलाते हैं कि कंपनी आपके फोन के माइक्रोफोन के जरिए आपकी बातों पर जासूसी बिल्कुल नहीं करती।
इंडियाटुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, मोसेरी ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर इस लंबे समय से चले आ रहे संदेह को संबोधित किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा, “हम आपकी बात नहीं सुनते। हम आपकी बातों को सुनने के लिए फोन के माइक्रोफोन का इस्तेमाल नहीं करते।” मोसेरी ने आगे समझाया कि अगर ऐप वास्तव में गुप्त रूप से रिकॉर्डिंग कर रहा होता, तो लोगों को तुरंत पता चल जाता। यह निजता का एक गंभीर उल्लंघन होगा, जिससे आपके फोन की बैटरी तुरंत खत्म हो जाएगी और माइक्रोफोन इंडिकेटर जलता हुआ दिखाई देगा।
तो फिर विज्ञापनों की यह सटीकता कैसे?
मोसेरी ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि विज्ञापनों की इतनी सटीक टाइमिंग के पीछे क्या कारण हो सकते हैं, जिससे यह जासूसी का भ्रम पैदा होता है।
उन्होंने कुछ ऐसे परिदृश्यों का उल्लेख किया, जहाँ ऐसा लग सकता है कि इंस्टाग्राम आपकी जासूसी कर रहा है, जबकि ऐसा है नहीं। मोसेरी का सुझाव है कि अक्सर हम यह भूल जाते हैं कि हमने ऑनलाइन किसी संबंधित प्रोडक्ट पर टैप किया था या उस बातचीत से ठीक पहले किसी शॉपिंग वेबसाइट पर विजिट किया था।
वे बताते हैं कि चूंकि मेटा उन विज्ञापनदाताओं के साथ मिलकर काम करता है जो अपनी वेबसाइटों पर आने वाले विज़िटर्स को ट्रैक करते हैं, इसलिए इंस्टाग्राम सहित मेटा के सभी प्लेटफॉर्म पर उस गतिविधि के आधार पर यूजर्स को विज्ञापनों के लिए टारगेट किया जा सकता है। यानी, आपकी पिछली ऑनलाइन गतिविधियों के आधार पर आपको विज्ञापन दिखाए जाते हैं, न कि आपकी बातचीत सुनकर।
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