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भारत के लिए मनोनीत अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भारत पहुंच गए हैं और सोमवार को वे पहले दिन नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास में स्थित हैं।
अमेरिकी राजदूतावास में पहले दिन उन्होंने अपने भाषण में भारत-अमेरिका संबंध से लेकर मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड के रिश्ते और ट्रेड डील से जुड़ी बातें कहीं।
हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड अग्रवाल ने भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर कई बयान दिए। साथ ही उन्होंने धमकी भी दी कि अगर भारत रूस से रॉ ऑयल खरीद रहा है तो वो और अधिक टैरिफ भारत पर लगाएंगे।
इसके साथ ही रूस से तेल खरीदने वाले चीन, भारत और ब्राज़ील देशों पर 500 फ़ीसदी तक की तारीख़ लगाने का रास्ता साफ हो जाएगा।
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हालाँकि, अपने पहले दिन सर्जियो गोर ने ऐसी कई बातें कहीं जिसके बाद यह अनुमान लगाया गया कि दोनों देशों के बीच रिश्ते में वापसी होगी।
सर्जियो गोर ने क्या-क्या कहा?

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नई दिल्ली स्थिति अमेरिकी दूतावास में अपने समझौते के पहले दिन सर्जियो गोर ने भाषण में कहा था कि दोनों देशों में सौदेबाजी पर बातचीत हो रही है और मंगलवार को इस फिल्म पर बातचीत हो रही है।
उन्होंने कहा, “आपमें से कई लोगों ने मैत्री जारी व्यापार समझौते पर बातचीत की है। बातचीत की अनुमति नहीं है। दोनों पक्ष लगातार सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। सहमति, व्यापार को लेकर अगली बातचीत कल होने वाली है।”
“भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है। इसलिए इस सूची को अंतिम जगह तक पहुंचाना आसान काम नहीं है, लेकिन हम इसे पूरा करने के लिए पूरी तरह से अलग हैं। हालांकि व्यापार हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ-साथ हम सुरक्षा, प्रशिक्षण के सहयोग, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अन्य महत्वपूर्ण समूहों में भी शामिल होकर काम करते हैं।”
इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड हिटलर अगले एक या दो साल में भारत का दौरा कर सकते हैं।
सर्जियो ने अपना भाषण ‘नमस्ते’ भाषण की शुरुआत की। उन्होंने कहा, “अमेरिका के राजदूत विशेष रूप से यहां मेरे लिए खुशी की बात है। मैं इस खास देश में गेअर सम्मान और एक साफ मकसद के साथ आया हूं। मेरा उद्देश्य हमारे दोनों देशों की साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाना है। यह दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के बीच का मेल है।”
“बीते एक हफ्ते और डिनर मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत की अपनी पिछली यात्रा को भारत के महान प्रधानमंत्री के साथ अपनी गहरी दोस्ती का भी जिक्र किया था। मुझे उम्मीद है कि राष्ट्रपति जल्द ही भारत आएंगे, संभव है कि अगले एक या दो साल में।”
मोदी और अंख की ‘दोस्ती’ पर भी बोले

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सर्जियो गोर ने अपने लक्ष्य के बारे में कहा, “भारत से ज्यादा अहम कोई निंदा नहीं है। आने वाले महीनों और वर्षों में राजदूत के रूप में मेरा लक्ष्य एक अत्यंत महत्वाकांक्षी आकांक्षा को आगे बढ़ाता है। हम यह काम करते हैं, दोस्ती के साथ जुड़ेंगे, जहां दोनों पक्ष अपनी ताकत, सौहार्दपूर्ण सम्मान और नेतृत्व को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे।”
सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति की दोस्ती के बारे में भी बात की.
उन्होंने कहा, “मेरा दावा है कि पीएम मोदी के साथ उनकी दोस्ती बहुत सच्ची है। अच्छे दोस्त अशमत हो सकते हैं, लेकिन अंत में वो अपनी सारी दोस्ती दूर कर लेते हैं।”
इसी दौरान सर्जियो गोर ने ये भी जानकारी दी कि भारत को अमेरिका के नेतृत्व वाले सिलिका गुट में शामिल होने का पैक दिया गया।
उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में भी इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा, “यह साझा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत को अमेरिका के नेतृत्व वाली कंपनी पहल पैक्स सिलिका में शामिल होने का न्योता दिया जाएगा। यह मक़सद सुरक्षित, स्थिरता और नवाचार पर आधारित सिलिकॉन सिलिकॉन चेन तैयार करना है। जैसे-जैसे दुनिया नई अपनी तकनीक ले रही है, यह लक्ष्य है कि भारत और अमेरिका के कंधों से कंधा के साथ काम करना।”
कैसी आ रही हैं खरीदार

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इजराइल के भारत में राजदूत रियुवन अज़र ने सर्जियो गोर के एक्स पोस्ट को साझा किया है।
उन्होंने एक्स पर लिखा, “गुड लक एम्बेसडर सर्जियो गोर।”
अंग्रेजी समाचार वेबसाइट डी प्रिंट ने अपने ’50 वर्ड एडिट’ में सर्जियो गोर के राजदूत के पद का ज़िक्र किया है।
लेख में लिखा है, “सर्जियो गोर एक असामान्य अमेरिकी राजदूत हैं और दिल्ली से जुड़े कई तैशुदा प्लाजा को तोड़ते हैं। वह ऐसी राजधानी में आ रहे हैं, जहां स्मारक स्मारक और स्मारक से जुड़े हुए हैं, उम्र को समझदारी का पैमाना माना जाता है और युवावर्ग को उनके अभाव के रूप में देखा जाता है।”
“इसके अलावा सोशल मीडिया से तेज़ हुई अमेरिका-विरोधी जनवेना भी बहुत ही लेवल लेवल पर है, जो 1971 में थी।”
सर्जियो गोर की उम्र महज 39 साल है और वो भारत के राजदूत के साथ-साथ उन्हें दक्षिण और मध्य एशिया का विशेष दूत नियुक्त किया गया है।
इतने समय में भारत में राजदूत का पद बरकरार रहा जब दोनों देशों के कुछ अच्छे नहीं थे। अमेरिका ने भारत पर 50 फ़ीसदी टैरिफ़ रखा है और दोनों देशों के बीच अब तक ट्रेड डील नहीं हो पाई है।
वहीं हाल ही में कई बार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड डोनाल्ड ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कई बयान दिए हैं।
एक बयान में दावा किया गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे मुलाकात की थी और पूछा था कि “सर, प्लीज मैं आपसे क्या मिल सकता हूं। मैंने हां कहा क्योंकि मेरे साथ बहुत अच्छे लगते हैं।”
वहीं हाल ही में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हावर्ड ल्युटनिक ने ये दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड डोनाल्ड को कॉल न करने की वजह से ट्रेड डील फाइनल नहीं हो पाएगा।
बीबीसी के लिए कलइंटरव्यू न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित।
Source:www.bbc.com
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