ट्रंप का ‘सनकी’ फैसला, अमेरिका को पहुंचा रहा है भारी नुकसान: 35 दिनों से जारी शटडाउन ने मचाई तबाही
अमेरिका में सरकारी कामकाज ठप, विमानन व्यवस्था हुई चरमरा गई, लाखों यात्री फंसे
वाशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हठधर्मिता का खामियाजा आज पूरा अमेरिका भुगत रहा है। उनके अप्रत्याशित फैसलों का ही नतीजा है कि देश 35 दिनों से अधिक समय से सरकारी शटडाउन की चपेट में है, जो अमेरिकी इतिहास का सबसे लंबा शटडाउन बन गया है। इस अभूतपूर्व संकट ने देश भर में अव्यवस्था और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।
विमानन व्यवस्था ध्वस्त, लाखों यात्री परेशान:
शटडाउन का सबसे गंभीर असर देश की विमानन प्रणाली पर पड़ा है। एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, जो बिना वेतन के काम करने से इनकार कर रहे हैं, की अनुपस्थिति के कारण लाखों यात्री हवाई अड्डों पर फंस गए हैं। कई उड़ानें रद्द कर दी गई हैं या घंटों की देरी से चल रही हैं। प्रमुख हवाई अड्डों पर भगदड़ जैसी स्थिति देखी जा रही है, जिससे यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। संघीय विमानन प्रशासन (एफएए) ने भी स्वीकार किया है कि कर्मचारियों की कमी के कारण 10% हवाई यातायात सेवाओं को कम करना पड़ा है।
शटडाउन का कारण और प्रभाव:
यह शटडाउन 1 अक्टूबर को तब शुरू हुआ जब डेमोक्रटिक पार्टी के सदस्यों ने ट्रंप की अल्पकालिक वित्तीय सहायता के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। डेमोक्रेट्स ने ‘अफोर्डेबल केयर एक्ट’ के तहत स्वास्थ्य बीमा के लिए संघीय रियायत का विस्तार शामिल करने की मांग की है। जब संसद सरकारी खर्चों के लिए वित्तीय पैकेज को मंजूरी नहीं देती है, तो शटडाउन लागू होता है। इस शटडाउन ने न केवल आम नागरिकों को बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचाया है।
लंबा खिंचता संकट:
ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान 2018 में भी 35 दिनों तक सरकारी कामकाज ठप रहा था, लेकिन इस बार का शटडाउन उस रिकॉर्ड को भी पार कर चुका है। अब तक इस संकट का कोई समाधान नहीं निकला है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है। देश को इस गंभीर आर्थिक और सामाजिक संकट से उबारने के लिए जल्द ही कोई ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
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