परमाणु अखाड़ा: रूस का अमेरिका पर बढ़ा हुआ दबाव और वेनेज़ुएला में बढ़ती सैन्य उपस्थिति
रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर आ गया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने न केवल बड़े पैमाने पर परमाणु परीक्षणों को फिर से शुरू करने के संकेत दिए हैं, बल्कि रूस के पुराने अमेरिकी-विरोधी सहयोगी वेनेज़ुएला में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने की योजना भी बनाई है। ये कदम, भले ही अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में उठाए जा रहे हों, एक व्यापक रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं जिसका उद्देश्य अमेरिकी प्रभाव को चुनौती देना और यह प्रदर्शित करना है कि मॉस्को की शक्ति का प्रदर्शन केवल उसके पड़ोस तक सीमित नहीं है।
परमाणु तनाव का नया दौर: परमाणु परीक्षणों पर तीखी प्रतिक्रिया
परमाणु परीक्षणों का यह मुद्दा तब गरमाया जब पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका भी परमाणु हथियारों का परीक्षण फिर से शुरू कर सकता है। 1992 के बाद से अमेरिका ने कोई भी परमाणु विस्फोट आधारित परीक्षण नहीं किया है, हालांकि उसकी प्रयोगशालाएँ उन्नत कंप्यूटर सिमुलेशन और बिना परमाणु ऊर्जा वाले सबक्रिटिकल प्रयोगों के माध्यम से विस्फोटों का अनुकरण करती रही हैं। अमेरिकी ऊर्जा सचिव द्वारा बाद में यह स्पष्ट करने के बावजूद कि वाशिंगटन वास्तविक परमाणु विस्फोटों वाले परीक्षणों की योजना नहीं बना रहा है, मॉस्को की प्रतिक्रिया तीव्र रही।
रूस की सुरक्षा परिषद के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक में, राष्ट्रपति पुतिन ने रक्षा और विदेश नीति अधिकारियों को परमाणु परीक्षण फिर से शुरू करने के लिए संभावित प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस तभी कोई कदम उठाएगा जब अमेरिका पहले ऐसे परीक्षण करेगा, और किसी भी कार्रवाई को एक पारस्परिक उपाय के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।
यह ध्यान देने योग्य है कि रूस ने 2023 में व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (CTBT) का अनुसमर्थन वापस ले लिया था। रूस का तर्क था कि वाशिंगटन ने कभी भी इस समझौते का अनुसमर्थन नहीं किया है, इसलिए मॉस्को को अब एकतरफा रूप से इससे बाध्य नहीं होना चाहिए। 1996 में अपनाई गई यह संधि सभी परमाणु विस्फोटों पर प्रतिबंध लगाती है, लेकिन यह कभी भी पूरी तरह से कानूनी रूप से लागू नहीं हो पाई क्योंकि प्रमुख परमाणु संपन्न देशों ने इसका अनुसमर्थन नहीं किया है।
रणनीतिक दांवपेच: खतरे का महत्व
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस शायद परमाणु परीक्षण करने के लिए तुरंत तैयार नहीं है, क्योंकि यह एक महंगा कदम होगा और मॉस्को के संयम के दावों को कमजोर कर सकता है। फिर भी, इस खतरे का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक महत्व है। यह संकेत देता है कि यदि मॉस्को को लगता है कि वाशिंगटन भी इसी रास्ते पर चल रहा है, तो वह लंबे समय से चले आ रहे हथियार नियंत्रण मानदंडों को छोड़ने के लिए तैयार है। इसके साथ ही, यह रूस को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को यह याद दिलाने का अवसर भी देता है कि उसके पास दुनिया के सबसे बड़े और सबसे उन्नत परमाणु शस्त्रागारों में से एक है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


