वाह, नेपाल में भड़की इस असाधारण अशांति को एक नया स्वरूप देते हैं, जहाँ डिजिटल दुनिया के एक फैसले ने पूरे राष्ट्र को हिलाकर रख दिया है:
नेपाल में ‘जेन जेड’ का विद्रोह: एक सोशल मीडिया बैन ने कैसे गिराई सरकार और तबाह किए ऐतिहासिक स्थल
एक सरकारी फैसले ने पूरे नेपाल को हिलाकर रख दिया है। 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ ‘जेन जेड’ (Gen Z) द्वारा शुरू किए गए विरोध प्रदर्शनों ने 8 सितंबर से पूरे हिमालयी राष्ट्र को अपनी चपेट में ले लिया है। इस जनाक्रोश की कीमत 51 जिंदगियां और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार का पतन रहा है।
यह जनाक्रोश केवल मानवीय क्षति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राष्ट्र की ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक नींव को भी झकझोर दिया। 9 सितंबर को, प्रदर्शनकारियों ने हिमालयी राष्ट्र की कई प्रतिष्ठित इमारतों को निशाना बनाया, जिनमें एशिया का सबसे बड़ा और 120 साल पुराना महल, काठमांडू स्थित सिंह दरबार भी शामिल है, जिसे उसी दिन आग के हवाले कर दिया गया। चंद्र शमशेर जंग बहादुर राणा द्वारा 1903 में निर्मित, यह भव्य महल नेपाल के प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास हुआ करता था, जिसमें आठ आँगन और 1,700 कमरे थे।
लोकतंत्र का प्रतीक: नेपाल की संघीय संसद
सिंह दरबार के साथ ही, देश के लोकतंत्र के प्रतीक मानी जाने वाली नेपाल की संघीय संसद को भी 9 सितंबर को प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ का शिकार बनाया। इसमें राष्ट्रीय सभा और प्रतिनिधि सभा दोनों शामिल हैं।
न्याय का मंदिर: नेपाली सर्वोच्च न्यायालय
1956 में निर्मित नेपाल का सर्वोच्च न्यायालय भी इस आंदोलन की भेंट चढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने परिसर में हमला कर आग लगा दी, जिससे कई महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज़ जलकर नष्ट हो गए।
राजनीतिक केंद्र: नेपाली कांग्रेस का मुख्यालय
काठमांडू में नेपाली कांग्रेस, जो कि गठबंधन सरकार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी, उसके मुख्यालय को भी प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया। इतना ही नहीं, नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा के आवास पर भी हमला किया गया।
शीतल निवास: राष्ट्रपति भवन पर हमला
9 सितंबर को, काठमांडू के महाराजगंज स्थित राष्ट्रपति भवन, जिसे शीतल निवास के नाम से भी जाना जाता है, को भी प्रदर्शनकारियों ने आग के हवाले कर दिया। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्र शमशेर जंग बहादुर राणा द्वारा 1923 में निर्मित यह भवन भी जनाक्रोश का शिकार बना।
सम्मेलन केंद्र भी नहीं बचा: बीरेंद्र अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर
काठमांडू के न्यू बानेश्वर स्थित बीरेंद्र अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर, जिसका औपचारिक उद्घाटन 1993 में हुआ था, 9 सितंबर को प्रदर्शनकारियों द्वारा तोड़फोड़ का शिकार हुआ।
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