ईरान की वैश्विक हुंकार: स्कूल पर हमले को बताया ‘सोची-समझी साजिश’, अमेरिका और इजरायल पर लगाया नरसंहार का आरोप
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए नागरिक बुनियादी ढांचों पर हुए हमलों की तीखी आलोचना की। विशेष रूप से मीनाब प्राथमिक विद्यालय पर हुए उस भयावह हमले का जिक्र करते हुए, जिसमें 160 से अधिक निर्दोषों की जान चली गई, उन्होंने इन कृत्यों को ‘क्रूर युद्ध अपराध’ करार दिया। अराघची ने विश्व समुदाय से ईरान के साथ हो रहे इस घोर अन्याय के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया और स्पष्ट संदेश दिया कि उनका देश आत्मरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
अराघची ने ये प्रभावशाली बातें ईरान में हुए घातक स्कूल हमलों पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र की एक वर्चुअल बहस के दौरान कहीं।
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अपने संबोधन में अराघची ने चेतावनी देते हुए कहा कि अन्याय पर साधी गई चुप्पी शांति नहीं, बल्कि और अधिक असुरक्षा और मानवाधिकारों के हनन को जन्म देती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज संयुक्त राष्ट्र के मूल मूल्य और वैश्विक मानवाधिकार ढांचा गंभीर संकट में है। उन्होंने वैश्विक समुदाय को झकझोरते हुए कहा, “आप सभी को हमलावरों की निंदा करनी चाहिए। दुनिया की सामूहिक चेतना को इन हमलावरों को यह बताना होगा कि ईरानियों के खिलाफ किए जा रहे इन घृणित अपराधों के लिए उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने कभी युद्ध की पहल नहीं की, लेकिन जरूरत पड़ने पर वह पीछे भी नहीं हटेगा। उन्होंने कहा, “ईरानी एक शांतिप्रिय और महान राष्ट्र हैं, जो दुनिया की सबसे समृद्ध सभ्यताओं के उत्तराधिकारी हैं। फिर भी, उन्होंने उन अपराधियों के खिलाफ अटूट संकल्प दिखाया है जो अपराध की कोई सीमा नहीं जानते।”
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स्कूल पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए विदेश मंत्री ने इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका और इज़राइल के पास मौजूद अत्याधुनिक तकनीक और सैन्य डेटा प्रणालियों के रहते यह हमला ‘चूक’ नहीं हो सकता। अराघची के अनुसार, इस अत्याचार को न तो उचित ठहराया जा सकता है और न ही इस पर चुप्पी बरती जानी चाहिए। उन्होंने आंकड़ों के साथ बताया कि पिछले 27 दिनों में रेड क्रिसेंट के बचावकर्मी, रिफाइनरी, एम्बुलेंस, अस्पताल, स्वास्थ्यकर्मी और आवासीय क्षेत्रों को लगातार निशाना बनाया गया है। “पूरे ईरान में 600 से अधिक स्कूल खंडहर बना दिए गए हैं, जिसके कारण 1000 से अधिक छात्र और शिक्षक शहीद या घायल हुए हैं।” अराघची ने अंत में बेहद गंभीर लहजे में कहा कि ‘युद्ध अपराध’ शब्द भी ईरान पर हो रहे जुल्मों की भयावहता को बयां करने के लिए छोटा है। हमलावरों की रणनीति और उनकी भाषा स्पष्ट रूप से उनके ‘नरसंहार’ के इरादे को उजागर करती है।
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