गाजा में इजरायली हमले: 40 की मौत; पुतिन के भारत दौरे की साल के अंत में उम्मीद

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गाजा में इजरायली हमले: 40 की मौत; पुतिन के भारत दौरे की साल के अंत में उम्मीद
दुनियाः गाजा में इजरायली हमलों में 40 लोगों की मौत और साल के अंत में भारत का दौरा करेंगे पुतिन

गाजा जल रहा है: 40 जिंदगियों का दर्द और शांति की एक अनिश्चित राह

गाजा पट्टी में एक बार फिर खून की होली खेली गई। बुधवार की रात से गुरुवार तक चले इजरायली हमलों और गोलीबारी की बौछारों ने कम से कम 40 फलस्तीनियों की जान ले ली। नासिर अस्पताल से आ रही खबरें दिल दहला देने वाली हैं, जहां दक्षिणी गाजा में इजरायली गोलीबारी में 27 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से 14 बेगुनाह तो उस इजरायली सैन्य गलियारे के पास हताहत हुए, जो मानवीय सहायता वितरण का जरिया रहा है, लेकिन अक्सर गोलियों की आवाज से गूंजता है। वहीं, मध्य शहर दीर अल-बलाह के अल-अक्सा शहीद अस्पताल से 13 लोगों के मारे जाने की खबर है। गाजा शहर में, शिफा अस्पताल के स्वास्थ्य अधिकारी एक मिले शव और कई घायलों के भर्ती होने की बात कह रहे हैं। वे यह भी बताते हैं कि अस्पताल पहुंचना भी दूभर हो गया है, क्योंकि इजरायल शहर पर निर्णायक कब्जा जमाने की फिराक में बड़ा हमला कर रहा है।

इस खूनी मंजर के बीच, हमास लगभग दो साल से जारी विनाशकारी युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित एक योजना पर विचार कर रहा है। यह योजना एक नाजुक संतुलन साधने की कोशिश करती है: हमास को अपने 48 बंधकों को वापस करना होगा, जिनमें से लगभग 20 को इजरायल अभी भी जीवित मानता है। इसके एवज में सैकड़ों फलस्तीनी कैदियों की रिहाई का वादा किया गया है। इतना ही नहीं, योजना में हमास से सत्ता छोड़ने और हथियार डालने की भी मांग की गई है। हालांकि, इस प्रस्ताव में एक फलस्तीनी राष्ट्र की स्थापना का कोई जिक्र नहीं है, जो एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस योजना को स्वीकार कर लिया है, लेकिन फलस्तीनी जनता युद्ध के अंत की तो कामना करती है, पर कई लोगों को यह योजना इजरायल के पक्ष में झुकी हुई लगती है।

हमास की ओर से फिलहाल मिली-जुली प्रतिक्रिया आ रही है। एक हमास अधिकारी ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ से बातचीत में कहा कि प्रस्ताव की कुछ बातें "अस्वीकार्य" हैं, हालांकि उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं बताया। बुधवार को ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को ही एक अन्य अधिकारी ने बताया कि ट्रंप और नेतन्याहू की सहमति से भेजे गए इस प्रस्ताव के कुछ बिंदु स्वीकार नहीं किए जा सकते और उनमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि आधिकारिक प्रतिक्रिया अन्य फलस्तीनी गुटों से विचार-विमर्श के बाद ही दी जाएगी, जो इस जटिल समीकरण में और अधिक अनिश्चितता जोड़ता है।


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