इस्लामाबाद की कोशिशें एक तरफ, जेडी वेंस का दिल भारत के लिए धड़कता है: रिश्तों और नीतियों के बीच की अनकही कहानी
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की हालिया पाकिस्तान यात्रा के दौरान भले ही इस्लामाबाद ने उन्हें लुभाने और प्रभावित करने में कोई कसर न छोड़ी हो, लेकिन वेंस के दिल में भारत के प्रति जो विशेष अनुराग है, वह किसी से छिपा नहीं है। यह लगाव केवल कूटनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तिगत जीवन और पारिवारिक जड़ों से गहराई तक जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि वेंस ने सार्वजनिक मंचों पर अपने भारतीय मूल के ससुराल पक्ष की न केवल सराहना की है, बल्कि उन्हें एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत किया है। उनका यह रुख तब और महत्वपूर्ण हो जाता है जब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन नागरिकता और आप्रवासन के नियमों को और अधिक कड़ा करने की दिशा में बढ़ रहा है।
साझा विरासत और अमेरिकी विकास में योगदान
हाल ही में जॉर्जिया विश्वविद्यालय में ‘टर्निंग प्वाइंट यूएसए’ के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वेंस ने अमेरिका के नवनिर्माण में प्रवासियों की भूमिका को सराहा। उन्होंने अपने निजी अनुभवों को साझा करते हुए गर्व के साथ कहा कि उनके ससुराल वाले भारत से आए हैं और उन्होंने अमेरिकी समाज व अर्थव्यवस्था को समृद्ध बनाने में अहम भूमिका निभाई है। वेंस के अनुसार, उनके ससुराल वालों का जीवन और उनके संस्कार अमेरिका के प्रति उनके समर्पण का जीता-जागता उदाहरण हैं।
H-1B वीजा की चुनौतियां और वेंस का नजरिया
इसी कार्यक्रम के दौरान आप्रवासन प्रणाली की पेचीदगियां भी उभरकर सामने आईं। जब एक भारतीय मूल की युवती ने अपने माता-पिता के एक दशक से अधिक लंबे H-1B वीजा के इंतजार और ग्रीन कार्ड में हो रही देरी पर सवाल उठाया, तो वेंस ने बड़ी बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि H-1B प्रणाली में धोखाधड़ी एक गंभीर समस्या है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बहुत से आप्रवासी ऐसे हैं जिन्होंने अमेरिका को महान बनाया है। उन्होंने अपनी पत्नी उषा वेंस का उदाहरण देते हुए कहा कि वह भारतीय आप्रवासियों की बेटी हैं और उनका परिवार देश के लिए प्रेरणास्रोत है।
नागरिकता: कर्तव्य और वफादारी का संगम
वेंस ने नागरिकता के साथ आने वाली जिम्मेदारियों को भी रेखांकित किया। उनका मानना है कि कोई व्यक्ति चाहे पीढ़ियों से अमेरिका में हो या अभी-अभी नागरिक बना हो, उसका पहला और सर्वोच्च कर्तव्य ‘अमेरिका फर्स्ट’ होना चाहिए। अपने ससुर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वह भारत से आए, शिक्षित हुए और यहीं की नागरिकता ली, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने मूल देश के हितों को अमेरिका के ऊपर रखने का दबाव नहीं बनाया। वेंस की नजर में एक आदर्श अमेरिकी नागरिक की यही असली पहचान है।
भारत: ‘अनंत संभावनाओं’ का देश
जेडी वेंस और उषा वेंस के लिए भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि यादों का एक समंदर है। पिछले साल अप्रैल में अपने बच्चों के साथ भारत यात्रा के दौरान उन्होंने ताज महल और अक्षरधाम मंदिर जैसी धरोहरों का दीदार किया था। उस यात्रा को याद करते हुए वेंस ने भारत को “अनंत संभावनाओं” वाला राष्ट्र करार दिया था, जहां भविष्य की एक स्पष्ट और ऊर्जावान दृष्टि दिखाई देती है। उषा वेंस के लिए यह यात्रा भावुक कर देने वाली थी, क्योंकि इसके जरिए उनके बच्चे अपनी जड़ों और संस्कृति से रूबरू हुए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए उनके स्नेहपूर्ण व्यवहार की भी सराहना की।
नीतिगत कड़वाहट और भविष्य के संकेत
एक तरफ जहां व्यक्तिगत स्तर पर प्रवासियों के प्रति सम्मान है, वहीं दूसरी ओर आंकड़े एक अलग चुनौती पेश कर रहे हैं। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के अनुसार, जनवरी में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 70 हजार के पार चली गई, जो पिछले दो दशकों का उच्चतम स्तर है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि अमेरिका में आप्रवासन एक जटिल और बहुआयामी मुद्दा है। वेंस के बयान इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में ट्रंप प्रशासन की नीतियां सख्ती और योग्यता (merit) के बीच एक बारीक संतुलन बनाने की कोशिश करेंगी, जहां पहचान, जिम्मेदारी और योगदान पर गहन मंथन जारी रहेगा।
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