शांति के नोबेल का अनोखा मोड़: जब ट्रंप ने ‘बचाए’ 8 युद्ध और मचाडो ने कहा ‘ये आपका भी है’
2025 का प्रतिष्ठित नोबेल शांति पुरस्कार, जिसकी डोनाल्ड ट्रंप को बेसब्री से तलाश थी, आखिरकार वेनेजुएला की जुझारू विपक्ष नेता मारिया कोरीना मचाडो के नाम रहा। एक ओर जहाँ ट्रंप ने दुनिया में शांति स्थापित करने के अपने प्रयासों और 8 युद्ध रुकवाने के दावों का ज़िक्र किया, वहीं दूसरी ओर मचाडो ने एक असाधारण परिपक्वता दिखाते हुए पुरस्कार को ट्रंप को समर्पित कर दिया।
ट्रंप की ‘शांति पहल’ और नोबेल की दौड़
डोनाल्ड ट्रंप ने इस बार नोबेल पुरस्कार पाने के लिए ज़ोर-शोर से कोशिशें कीं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में 8 युद्ध रुकवाए, जिसमें आर्मेनिया-अजरबैजान, कोसोवो-सर्बिया, इज़रायल-ईरान, मिस्र-इथियोपिया, और रवांडा-कांगो जैसे संघर्ष शामिल थे। उन्होंने यूक्रेन युद्ध को भी अपनी शांति पहलों से जोड़ा। ट्रंप की इस कोशिश को कई देशों का समर्थन भी मिला, लेकिन 10 अक्टूबर को नॉर्वे की नोबेल समिति ने जब विजेता का ऐलान किया, तो उसमें ट्रंप का नाम नहीं था।
मचाडो का विनम्रतापूर्ण इशारा और ट्रंप की प्रतिक्रिया
मारिया कोरीना मचाडो को वेनेजुएला के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को बढ़ावा देने और तानाशाही से लोकतंत्र की ओर शांतिपूर्ण परिवर्तन के उनके संघर्ष के लिए यह सम्मान मिला। लेकिन पुरस्कार जीतने के बाद, मचाडो ने एक अनूठा कदम उठाते हुए कहा कि वह यह पुरस्कार राष्ट्रपति ट्रंप के सम्मान में स्वीकार कर रही हैं, क्योंकि यह असल में उन्हें मिलना चाहिए था। उन्होंने ट्रंप की वेनेजुएला की मदद के लिए प्रशंसा की।
इस पर ट्रंप ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैंने उनकी काफी मदद की थी। वेनेजुएला में तब हालात बहुत खराब थे और उन्हें बहुत मदद की जरूरत थी। मैं खुश हूं क्योंकि मैंने लाखों लोगों की जान बचाई…” ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि मचाडो ने उन्हें पुरस्कार समर्पित करना चाहा होगा, हालांकि उन्होंने खुद ऐसा करने को नहीं कहा था।
कौन हैं मारिया कोरीना मचाडो?
1967 में जन्मी मचाडो, जो तीन बच्चों की मां हैं, ने इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में डिग्री और फाइनेंस में मास्टर्स किया है। उन्होंने 2002 में ‘सुमाते’ नामक नागरिक संगठन की सह-स्थापना की, जिसने मादुरो शासन के बीच लोगों को एकजुट करने का काम किया। 2010 में वे राष्ट्रीय असेंबली के लिए चुनी गईं, लेकिन 2014 में शासन ने उन्हें पद से हटा दिया। वर्तमान में वह ‘वेंते वेनेजुएला’ पार्टी की प्रमुख हैं और 2017 में उन्होंने ‘सोय वेनेजुएला’ गठबंधन की सह-स्थापना की। 2023 में, उन्हें 2024 के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने वैकल्पिक उम्मीदवार का समर्थन किया।
महिलाओं का नोबेल शांति पुरस्कार: एक उभरता रुझान
हाल के वर्षों में, नोबेल शांति पुरस्कार उन महिला नेताओं को भी दिया गया है जिन्होंने अधिनायकवादी शासन के खिलाफ साहसपूर्वक आवाज उठाई है। 2023 में ईरानी कार्यकर्ता नरगिस मोहम्मदी, 2011 में यमन की तवक्कुल कर्मन, लाइबेरिया की एलेन जॉनसन सरलीफ और लेमह गबोवी, और 1991 में म्यांमार की आंग सान सू की को यह सम्मान मिला है। पहली महिला विजेता बेर्था वॉन सट्नर थीं, जिन्हें 1905 में यह पुरस्कार मिला था।
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