धन्यवाद का पावन पर्व: पोप की बातों से जगा आभार का भाव
वेटिकन सिटी: पोप फ्रांसिस ने मंगलवार को ‘धन्यवाद’ (Thanksgiving) के इस खूबसूरत पर्व को एक ऐसा अनूठा उत्सव बताया है, जो हर आस्था के लोगों को एक सूत्र में पिरो देता है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह पर्व उन सभी के लिए है जो जीवन की अनमोल देन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना चाहते हैं, चाहे वे आस्तिक हों या नास्तिक।
पोप ने स्वयं कई ऐसी चीजों का उल्लेख किया, जिनके लिए वे गहरा आभार महसूस करते हैं, और सभी से आग्रह किया कि वे भी अपने जीवन में मिले उन उपहारों को पहचानें और उनके प्रति धन्यवाद व्यक्त करें। उन्होंने कहा, “सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण उपहार है जीवन का वो अनमोल तोहफा, आस्था का वो प्रकाश, और एकता का वो मजबूत बंधन।”
कैसल गोंडोल्फो में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पोप ने यह बात कही। यह स्थान पोप के लिए विशेष है, जहाँ वे अक्सर अपने व्यक्तिगत समय का आनंद लेते हैं, और यहीं पर वे टेनिस जैसे खेल भी खेलते हैं।
‘धन्यवाद’ पर्व के सार को बयां करते हुए पोप ने कहा, “यह एक अद्भुत पर्व है जो हम सबको जोड़ता है, और यह हर व्यक्ति को उन सभी चीज़ों के लिए आभार व्यक्त करने का मौका देता है, जो उन्हें जीवन में मिली हैं।”
खास बात यह है कि पोप फ्रांसिस के लिए यह ‘धन्यवाद’ का दिन तुर्किये में पहला अवसर होगा, जब वे इस पर्व को मनाएंगे। यह उनके लिए एक यादगार अनुभव साबित होगा, जहाँ वे इस कृतज्ञता के भाव को नए परिप्रेक्ष्य में देखेंगे।
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