हिमाचल प्रदेश की उचित मूल्य दुकानों के लिए ई-पीओएस उपकरणों की खरीद में उच्चतम न्यायालय का अहम फैसला: विवादित निविदा रद्द, नई राहें खुलीं
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश सरकार को एक बड़ी राहत देते हुए, उचित मूल्य वाली दुकानों के लिए इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट-ऑफ-सेल (ई-पीओएस) उपकरणों की खरीद से जुड़ी विवादित निविदा को रद्द करने की अनुमति प्रदान कर दी है। यह फैसला, मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने के बाद न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा लिखा गया उनका पहला महत्वपूर्ण निर्णय है, जो राज्य की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक नया अध्याय खोलेगा।
सोमवार को जारी अपने विस्तृत फैसले में, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को निजी कंपनी ओएसिस साइबरनेटिक्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में जारी आशय पत्र (एलओआई) को वापस लेने का पूरा अधिकार है। इस निर्णय के साथ, उच्चतम न्यायालय ने मई, 2024 में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए उस आदेश को भी पलट दिया, जिसमें एलओआई को बहाल किया गया था।
दोहरे प्रश्नों पर न्यायालय का विश्लेषण:
सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में दो मुख्य बिंदुओं पर गहन विचार-विमर्श किया:
- क्या एलओआई बाध्यकारी अनुबंध था? न्यायालय ने सबसे पहले यह परखा कि क्या दो सितंबर, 2022 को जारी किया गया आशय पत्र (एलओआई) ओएसिस कंपनी के पक्ष में कोई पूर्ण और बाध्यकारी अधिकार उत्पन्न करता है।
- क्या निविदा रद्द करना मनमाना था? दूसरे, अदालत ने इस बात का मूल्यांकन किया कि क्या राज्य सरकार द्वारा एलओआई को रद्द करने का निर्णय मनमाना था, या यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत था।
न्यायालय का निष्कर्ष: प्रशासनिक विवेक का वैध उपयोग
अपने फैसले में, शीर्ष अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि किसी भी परिस्थिति में, आशय पत्र (एलओआई) एक पूर्ण और अंतिम अनुबंध में परिवर्तित नहीं हुआ था। इसलिए, छह जून, 2023 को राज्य सरकार द्वारा इसे रद्द किया जाना ‘प्रशासनिक विवेक का एक वैध और उचित उपयोग’ माना गया। न्यायालय ने पाया कि इस निर्णय में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं था।
नई निविदा का मार्ग प्रशस्त:
इस महत्वपूर्ण फैसले के साथ ही, उच्चतम न्यायालय ने राज्य सरकार को यह निर्देश भी दिया है कि वह उचित मूल्य वाली दुकानों के लिए ई-पीओएस मशीनों की आपूर्ति और रखरखाव से संबंधित एक नई और पारदर्शी निविदा प्रक्रिया शुरू करने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र है। उल्लेखनीय है कि इस नई निविदा प्रक्रिया में ओएसिस कंपनी भी, यदि निर्धारित पात्रता मापदंडों को पूरा करती है, तो भाग लेने की अधिकारी होगी।
आधुनिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली की ओर एक कदम:
यह पूरा विवाद हिमाचल प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को अत्याधुनिक बनाने की महत्वकांक्षी योजना से जुड़ा था। इस योजना के तहत, ई-पीओएस मशीनों को आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और आंखों की पुतलियों की स्कैनिंग जैसी उन्नत सुरक्षा और पहचान सुविधाओं से लैस किया जाना था, ताकि लाभार्थियों तक खाद्यान्न की निर्बाध और पारदर्शी पहुंच सुनिश्चित की जा सके। उच्चतम न्यायालय के इस फैसले से अब इस दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
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