ट्रंप का मध्य पूर्व में शांति का दावा: क्या यह एक “डील” है या बस एक “ड्रामा”?
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर वैश्विक मंच पर छाए हुए हैं। उनका दावा है कि वे इज़रायल और हमास के बीच चल रहे खूनी संघर्ष को समाप्त करने के मुहाने पर हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ सोशल” पर घोषणा की है कि वे जल्द ही मध्य पूर्व की यात्रा पर निकलेंगे, जहाँ वे युद्धविराम का ऐलान कर सकेंगे और दो साल से बंधक बनाए गए लोगों का स्वागत कर पाएंगे।
यह सिर्फ एक कूटनीतिक दांव नहीं, बल्कि ट्रंप के उस लंबे समय से चले आ रहे “डील मेकर” और “पीसमेकर” बनने के सपने को साकार करने का प्रयास है। दिलचस्प बात यह है कि 2025 के नोबेल शांति पुरस्कार के विजेता की घोषणा उनके इस संभावित दौरे से कुछ ही घंटे पहले होने वाली है, और ट्रंप ने पहले भी पुरस्कार जीतने की अपनी प्रबल इच्छा जाहिर की है।
हालांकि, ट्रंप का प्रस्तावित “शांति समझौता” फिलहाल एक अस्थायी युद्धविराम से अधिक प्रतीत नहीं होता। मध्य पूर्व में शांति की राह हमेशा से कांटों भरी रही है, और इस बार भी अनिश्चितताओं का अंबार है। यदि हमास अपने बचे हुए 20 जीवित बंधकों को इस सप्ताह रिहा कर देता है, तो यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी। लेकिन असली परीक्षा तो तब होगी जब इज़रायल गाज़ा शहर से अपनी सेना वापस बुलाने पर सहमत होगा।
कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के वरिष्ठ विश्लेषक आरोन डेविड मिलर ने न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में कहा, “अगर यह युद्धविराम और बंधक रिहाई समझौता सफल होता है, तो यह केवल ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर दबाव डालने के कारण संभव हुआ है। इससे पहले किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने किसी इज़रायली प्रधानमंत्री पर इतना सख्त रुख नहीं अपनाया।”
ट्रंप अपने पहले कार्यकाल के दौरान “अब्राहम समझौते” के लिए जाने जाते हैं, जिसने इज़रायल और संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सूडान और मोरक्को जैसे अरब देशों के बीच कूटनीतिक संबंध स्थापित किए थे। उस समय सऊदी अरब भी इस समझौते में शामिल होने के करीब था, जिससे चिंतित होकर हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को एक बड़ा हमला किया था।
इस हमले के बाद इज़रायल की प्रतिक्रिया अत्यंत हिंसक रही। गाज़ा के 90% घर तबाह हो गए और 60,000 से अधिक फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इज़रायल की छवि को भी भारी नुकसान पहुंचा।
नेतन्याहू ने भले ही दावा किया हो कि उन्होंने हमास के शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर दिया है, लेकिन गाज़ा में हुई तबाही ने दुनिया को झकझोर दिया। ट्रंप प्रशासन इस बार नेतन्याहू पर लगाम कसने में सफल होता दिख रहा है। यहाँ तक कि जब नेतन्याहू ने कतर में हमास के वार्ताकारों पर हमला किया, तो ट्रंप ने उनसे माफी मांगने को कहा, और वह तस्वीरें सार्वजनिक भी हुईं।
हालांकि, अभी भी कई सवाल अनुत्तरित हैं: क्या हमास अपने हथियार छोड़ देगा? क्या इज़रायल गाज़ा से पूरी तरह पीछे हटेगा? और क्या फिलिस्तीनी अथॉरिटी को कोई भूमिका मिलेगी? इतिहास गवाह है कि इस क्षेत्र में “स्थायी शांति” स्थापित करना अत्यंत दुष्कर रहा है।
यदि यह समझौता कायम रहता है, तो ट्रंप थिओडोर रूजवेल्ट, वुडरो विल्सन, बराक ओबामा और जिमी कार्टर जैसे चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों की श्रेणी में शामिल हो सकते हैं जिन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। लेकिन फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि क्या यह युद्धविराम स्थायी साबित होगा या मध्य पूर्व की धरती एक बार फिर किसी नए संघर्ष का गवाह बनेगी।
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