ईरान युद्ध के बीच ट्रंप का बड़ा धमाका: पीएम स्टारमर को दिया झटका, बोले- “अब मुझे तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं!”

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ट्रंप का ब्रिटेन को कड़ा संदेश: ‘हमें तुम्हारी जरूरत नहीं, पर हम याद रखेंगे’

मिडिल ईस्ट में ईरान के साथ जारी भीषण तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए ब्रिटेन को बड़ा झटका दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट कर दिया है कि अब उन्हें इस युद्ध में यूनाइटेड किंगडम के एयरक्राफ्ट कैरियर की कोई सहायता नहीं चाहिए।

ट्रंप ने तंज भरे लहजे में कहा कि ब्रिटेन, जो कभी अमेरिका का सबसे विश्वसनीय साथी हुआ करता था, अब बहुत देर से युद्ध में शामिल होने का मन बना रहा है। उन्होंने दोटूक शब्दों में लिखा, ‘हमें उन लोगों की जरूरत नहीं है जो हमारे जीतने के बाद युद्ध में शामिल हों, लेकिन हम इस व्यवहार को याद रखेंगे।’

ब्रिटिश पीएम को सीधे संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘कोई बात नहीं, प्राइम मिनिस्टर स्टारमर, हमें अब आपकी जरूरत नहीं है। हमें ऐसे लोगों की आवश्यकता नहीं है जो जीत तय होने के बाद साथ आएं, पर यह बात हमारे जेहन में रहेगी।’

ब्रिटेन-अमेरिका संबंधों में बढ़ती दरार

ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद से ही दोनों देशों के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है। हाल ही में जर्मन चांसलर के साथ मुलाकात के दौरान भी ट्रंप ने ब्रिटेन के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने ब्रिटिश पीएम कीर स्टारमर पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना विंस्टन चर्चिल से की और कहा कि स्टारमर में चर्चिल जैसा नेतृत्व नहीं है। इसके अलावा, डिएगो गार्सिया मिलिट्री बेस और चागोस आइलैंड्स को लेकर चल रहे विवादों को भी ट्रंप ‘बेवकूफी भरा फैसला’ करार दे चुके हैं।

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ब्रिटेन में उठते विरोध के स्वर

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच छिड़ी इस जंग ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। इस संघर्ष में अब तक ईरान में 1,300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि अमेरिका ने भी अपने 6 सैनिकों की मौत की पुष्टि की है। युद्ध का असर ब्रिटेन में भी दिख रहा है, जहां आम जनता के बीच गहरा असंतोष है। लंदन की सड़कों पर हजारों लोग विरोध में उतरे हैं। एक सर्वे के अनुसार, 56 प्रतिशत ब्रिटिश नागरिक इस पक्ष में हैं कि अमेरिका को ब्रिटेन के मिलिट्री बेस इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी।

दबाव में पीएम स्टारमर की सफाई

ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर इस समय चौतरफा दबाव का सामना कर रहे हैं। उन्होंने संसद में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ब्रिटेन सीधे तौर पर अमेरिकी और इजरायली हमलों का हिस्सा नहीं है। उन्होंने मिलिट्री बेस के इस्तेमाल को एक सुरक्षात्मक कदम बताते हुए कहा कि यह केवल बचाव के लिए उठाया गया कदम है। इसके साथ ही, उन्होंने फ्रांस और जर्मनी के साथ एक साझा बयान जारी कर यह स्पष्ट किया है कि वे केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए ही कोई कदम उठाएंगे।

पीएम कीर स्टारमर ने जोर देते हुए कहा, ‘हम यूएस और इजरायली हमलों में शामिल नहीं हो रहे हैं। हमारा उद्देश्य ब्रिटेन के राष्ट्रीय हितों और ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षा करना है।’

यूरोपीय देशों ने अपने साझा बयान में कहा, ‘हम इस क्षेत्र में अपने और अपने साथियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। हम इस मुद्दे पर अमेरिका और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ तालमेल बनाकर काम करने पर सहमत हुए हैं।’

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अमेरिका की बदलती कूटनीति और नए साथी

ट्रंप प्रशासन अब अपने पारंपरिक यूरोपीय सहयोगियों के बजाय उन देशों की ओर हाथ बढ़ा रहा है जो राजनीतिक रूप से उनके ज्यादा करीब हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक समिट में संकेत दिया कि जरूरत के समय अक्सर पुराने साथी पीछे हट जाते हैं। उन्होंने कहा, ‘हमने अनुभव किया है कि जब आपको किसी साथी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तो शायद वह वहां मौजूद न हो।’ इस बीच, इजरायल और अमेरिका के ईरान पर लगातार हो रहे हमलों से लेबनान, कुवैत और इराक जैसे देशों में भी तनाव चरम पर है और मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है।


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