एक तरफ जहां ट्रंप ईरान को लगातार धमका रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यमन में ईरान समर्थक अंसारउल्लाह (हूती) विद्रोही अपनी ही चाल चल रहे हैं, जिसके चलते कदम-कदम पर सऊदी समर्थित सेनाओं को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के हूती लड़ाके सऊदी समर्थित हुकूमत की राजधानी अदन से अब महज 80 किलोमीटर की दूरी पर हैं और हर गुजरते घंटे के साथ यह फासला और भी कम होता जा रहा है। गौरतलब है कि साल 2015 में जब से अंसारउल्लाह ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर अपनी सरकार बनाई है, तब से सऊदी समर्थक हुकूमत का हेडक्वार्टर अदन शिफ्ट कर दिया गया था। अब हूतियों की इस आक्रामक बढ़त ने सऊदी समर्थित यमन सरकार के वजूद पर बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने फौजी सूत्रों के हवाले से यह दावा किया है कि हूती अब अदन के 80 किलोमीटर के दायरे में पहुंच चुके हैं।
साल 2015 के बाद से हूती कभी भी अदन के इतने करीब नहीं पहुंच पाए थे। हालांकि, उस वक्त भी जब जंग छिड़ी थी, तो हूती लश्कर के कुछ लड़ाके अदन तक पहुंचने में कामयाब जरूर हुए थे, लेकिन बाद में प्रो-सऊदी फोर्सेस ने उन्हें वहां से खदेड़ दिया था। अगर गौर किया जाए, तो हूतियों ने लगभग पूरा यमन फतह कर लिया है। आसमान से होती भीषण सऊदी बमबारी के बीच यह कामयाबी किसी चमत्कार से कम नहीं है। अक्टूबर के शुरुआती हफ्ते में ही यमन के ताएज शहर पर कब्जे को लेकर सऊदी समर्थित फोर्सेस और हूती मिलिशिया के बीच एक लंबी और घमासान लड़ाई हुई थी। इस संघर्ष के दौरान सऊदी अरब ने महज 24 घंटों के भीतर हूती फाइटर्स के रणनीतिक ठिकानों और नागरिक इलाकों पर 106 एयर स्ट्राइक्स की थीं। इसके बावजूद, अंसारउल्लाह यानी हूती लड़ाकों ने ताएज पर कब्जा जमा ही लिया और अदन को जोड़ने वाली अहम सप्लाई रोड को भी काट दिया। ताएज पर हूतियों का यह कब्जा सऊदी समर्थित ताकतों के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हुआ है, क्योंकि इसी के बूते वे अब अदन के इतने करीब पहुंच गए हैं। दरअसल, ताएज दक्षिण-पश्चिम यमन का एक बेहद अहम रणनीतिक गेटवे है। ताएज की ऊंचाइयों से अदन की तरफ जाने वाले मुख्य रास्तों और सप्लाई रूट्स पर हौसियों (हूतियों) का काबिज होना बहुत बड़ी घटना थी और अब करीब 25 दिन बाद वे ताएज से आगे बढ़कर अदन से महज 80 किलोमीटर की दूरी पर आ खड़े हुए हैं।
ताएज पर मजबूत पकड़ का सीधा मतलब यह था कि अदन और दक्षिण में मौजूद सऊदी समर्थित बलों की आपसी कनेक्टिविटी बुरी तरह प्रभावित हो। इसके अलावा, ताएज गवर्नरेट का सीधा जुड़ाव मोखा और लाल सागर के तट से है, इसलिए इसकी अहमियत सिर्फ जमीनी लड़ाई तक सीमित नहीं थी। बरसों से युद्ध का अनुभव रखने वाले सऊदी समर्थक गुटों के हमलों और आसमान से बरसती सऊदी एयरफोर्स की बमबारी के बीच, जमीन पर आगे बढ़ते हूती लड़ाकों ने आखिरकार दुश्मन सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है। ताएज के बाद अब वे अदन से महज 80 किलोमीटर पीछे डटे हुए हैं। ताएज को अदन से जोड़ने वाले ताएज-अदन रोड के एक अहम चौराहे पर अब हूती लड़ाकों का कब्जा है और वहां उनकी गाड़ियां फर्राटा भर रही हैं। हालांकि, सऊदी समर्थित गठबंधन भी हूती ठिकानों पर जोरदार पलटवार कर रहा है और सऊदी अरब के लड़ाकू विमान यमन में हूतियों के नियंत्रण वाले इलाकों में लगातार बमबारी कर रहे हैं। इसके जवाब में हूतियों ने भी सऊदी के खिलाफ अपने हमलों को और तेज कर दिया है।
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