अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन से बढ़ती नाराजगी और अर्थव्यवस्था को संभालने के उनके तौर-तरीकों से उपजी निराशा मंगलवार को मध्यावधि चुनावों के लिए मतदान केंद्रों पर पहुंचने वाले अमेरिकियों के बीच डेमोक्रेट्स के लिए एक बड़ा ट्रंप कार्ड साबित हो सकती है।
3 नवंबर से ठीक पहले, ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘सिएना’ द्वारा किए गए एक ताजा और सनसनीखेज सर्वेक्षण में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि रिपब्लिकन सीनेटरों के गढ़ माने जाने वाले छह महत्वपूर्ण राज्यों में से पांच में डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे निकल चुके हैं। आयोवा में मुकाबला कांटे का और लगभग बराबरी का बना हुआ है, जबकि मिशिगन में डेमोक्रेट्स ने दो अंकों की मजबूत बढ़त के साथ अपनी बादशाहत कायम रखी है, जो इस सर्वे में शामिल एकमात्र ऐसा राज्य है जहां वे अपनी मौजूदा सीनेट सीट का बचाव कर रहे हैं। चुनाव के दिन से पहले आए इस अंतिम ‘टाइम्स/सिएना’ सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि डेमोक्रेट्स के हाथ एक ऐतिहासिक और सुनहरा मौका लग सकता है। सीनेट में बहुमत का जादुई आंकड़ा छूने के लिए, पार्टी को न केवल अपनी मौजूदा सीटें बचाए रखनी होंगी, बल्कि रिपब्लिकन के कब्जे वाली कम से कम चार सीटों पर भी कब्जा जमाना होगा।
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इस राजनीतिक उठापटक के बीच सबसे बड़ा उलटफेर टेक्सास और कंसास से देखने को मिला है, जहां दशकों से रिपब्लिकन पार्टी को एकतरफा वोट मिलने का इतिहास रहा है, लेकिन इस बार डेमोक्रेट्स ने यहाँ भी सेंध लगाकर बढ़त बना ली है। टेक्सास में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टालारिको, रिपब्लिकन केन पैक्सटन से 50% बनाम 43% के अंतर से आगे चल रहे हैं, जबकि कंसास में डेमोक्रेट एडम हैमिल्टन, मौजूदा रिपब्लिकन रोजर मार्शल को 49% बनाम 44% से पछाड़ते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा मेन (Maine) में भी डेमोक्रेट्स बाजी मारते दिखे, जहाँ ट्रॉय जैक्सन ने रिपब्लिकन सीनेटर सुसान कोलिन्स पर 51% बनाम 45% की बढ़त बनाई; ओहियो में पूर्व सीनेटर शेरोड ब्राउन मौजूदा जॉन हस्टेड से 49% बनाम 44% से आगे रहे; और अलास्का में मैरी पेल्टोला ने रिपब्लिकन सीनेटर डैन सुलिवन पर 48% बनाम 46% की मामूली लेकिन अहम बढ़त हासिल की। आयोवा में डेमोक्रेट जोश ट्यूरेक ने रिपब्लिकन एशले हिंसन को 48% बनाम 47% के मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया। वहीं, सर्वे में मिशिगन के अब्दुल अल-सैयद को सबसे धमाकेदार बढ़त मिली, जो रिपब्लिकन माइक रोजर्स के 42% के मुकाबले 53% के भारी समर्थन के साथ सबसे आगे चल रहे हैं।
अर्थव्यवस्था बनी डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए संजीवनी और सबसे बड़ा हथियार
सर्वे के आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन सात राज्यों में यह सर्वे किया गया, वहां राष्ट्रपति ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग महज 38% पर सिमट गई है। आम जनता की सबसे बड़ी चिंता यानी ‘जीवन-यापन की लागत’ के मुद्दे पर डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन्स पर नौ अंकों की भारी-भरकम बढ़त बना ली है और हर एक राज्य में उनके उम्मीदवार इस मोर्चे पर आगे हैं। इसके अलावा, मतदाताओं ने विदेशी युद्धों के प्रबंधन और आम अमेरिकियों के हितों की रक्षा करने जैसे अहम सवालों पर भी रिपब्लिकन की तुलना में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को ही अपनी पहली पसंद माना है।
टाइम्स/सिएना के इन नतीजों से साफ है कि मिशिगन, कंसास, टेक्सास और ओहियो में उठाए गए सभी चार प्रमुख मुद्दों पर डेमोक्रेट्स छाए हुए हैं। सात में से छह राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की ‘नेट फेवरेबिलिटी’ (जनसमर्थन) विरोधियों से काफी बेहतर है। केवल मेन (Maine) राज्य इसका अपवाद साबित हुआ, जहाँ जैक्सन और कोलिन्स दोनों की ही नेट रेटिंग नकारात्मक दायरे में दर्ज की गई। डेमोक्रेट्स की इस सफलता के पीछे ‘स्वतंत्र मतदाताओं’ (Independent Voters) का बड़ा हाथ रहा, क्योंकि सर्वे किए गए हर एक राज्य में इस तटस्थ वर्ग ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों पर ही भरोसा जताया है।
हालांकि, खेल अभी पूरी तरह बदला नहीं है; अंतिम समय में पाला बदलने वाले मतदाता (Late Deciders) रिपब्लिकन्स के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर उभर सकते हैं, इसलिए डेमोक्रेट्स को अभी से अति-उत्साह से बचने की जरूरत है। सर्वे में यह भी सामने आया है कि जिन मतदाताओं ने चुनाव से महज एक महीने पहले ही अपना मन बनाया है, उनमें से 9 प्रतिशत अधिक लोगों ने रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में मतदान किया है। इसके अलावा, एक बहुत बड़ा वर्ग अब भी ‘अनिर्णीत’ बना हुआ है, जो अंतिम समय में पोलिंग के सभी अनुमानों को धड़ाम कर सकता है। इसके अलावा ओपिनियन पोल की सटीकता हमेशा से एक बड़ा सवाल रही है; मिसाल के तौर पर, 2020 के चुनाव से ठीक पहले आए हर सर्वे में सुसान कोलिन्स पिछड़ती हुई नजर आ रही थीं, लेकिन जब नतीजे आए तो उन्होंने आसानी से शानदार जीत दर्ज कर ली थी।
अंतिम पलों में फैसला लेने वाले वोटर्स बने चुनावी मुकाबले का असली ‘एक्स-फैक्टर’
अमेरिकी मिडटर्म सीनेट चुनावों के मुहाने पर खड़े इस रोमांचक मुकाबले में अंतिम क्षणों में निर्णय लेने वाले मतदाता (Last-minute Voters) चुनाव के पूरे पासे को पलटने का माद्दा रखते हैं। ‘टाइम्स/सिएना’ के ताजा तरीन सर्वेक्षण ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि जिन वोटर्स ने पिछले एक महीने के भीतर अपने मत का फैसला किया है, उनमें से रिपब्लिकन पार्टी को लगभग 9 प्रतिशत अंकों की मजबूत और निर्णायक बढ़त हासिल हुई है। इसके साथ ही, बड़ी संख्या में मौजूद ‘अनिर्णीत मतदाताओं’ (Undecided Voters) ने इस चुनावी जंग के सस्पेंस को और अधिक बढ़ा दिया है।
- टेक्सास में पैक्सटन की घटती साख: टेक्सास के रण में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टैलारिको की व्यक्तिगत साफ-सुथरी छवि जनता के बीच गहरी पैث बना रही है। सर्वे में 49% मतदाताओं ने उन्हें सकारात्मक और केवल 39% ने नकारात्मक माना है। इसके उलट, रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्सटन की लोकप्रियता में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जहाँ 54% जनता उन्हें प्रतिकूल और महज 33% ही अनुकूल मानती है।
- कंसास के पारंपरिक रिपब्लिकन वोटर्स में बड़ी सेंध: कंसास में डोनाल्ड ट्रंप का मजबूत गढ़ होने के बावजूद डेमोक्रेट एडम हैमिल्टन ने बाजी अपने नाम की हुई है। चौंकाने वाली बात यह है कि हैमिल्टन पारंपरिक रिपब्लिकन वोटरों के करीब 13% हिस्से को अपने पाले में खींचने में पूरी तरह कामयाब रहे हैं।
- मिशिगन में डेमोक्रेट्स का दबदबा: पार्टी के भीतरूनी कलह और तमाम विवादों के बावजूद अब्दुल अल-सईद ने मिशिगन में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखते हुए दो अंकों की ठोस बढ़त कायम रखी है।
- अलास्का में फंसा पेंच: अलास्का एकमात्र ऐसा राज्य रहा जहाँ सितंबर के सर्वे की तुलना में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार मैरी पेल्टोला के ग्राफ में थोड़ी गिरावट आई है। हालांकि, यह गिरावट उस राजनीतिक भूचाल से पहले के रुझानों में दर्ज की गई थी, जिसमें सीनेट की इस रेस में एक डमी उम्मीदवार को खड़ा किए जाने के गंभीर आरोप लगे थे।
सर्वे का दायरा और कार्यप्रणाली
यह महत्वपूर्ण और व्यापक सर्वेक्षण 23 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच देश के 7 प्रमुख राज्यों के 6,000 से अधिक संभावित और सक्रिय मतदाताओं के बीच बेहद सावधानी से आयोजित किया गया था। देश के दिग्गज राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2020 में सुसान कॉलिन्स की अप्रत्याशित और चौंकाने वाली जीत की तर्ज पर, इस बार भी अंतिम समय में आने वाले पोलिंग अनुमानों और धरातल पर दिखने वाले वास्तविक परिणामों में भारी अंतर देखने को मिल सकता है, जो अमेरिकी राजनीति की दिशा तय करेगा।
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