आभूषण बाज़ार पर संकट के बादल: क्यों महंगा हो रहा है सोना और क्या है विशेषज्ञों की राय?
पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और अस्थिर तेल आपूर्ति शृंखलाओं का सीधा असर अब भारतीय आभूषण बाज़ार पर दिखने लगा है। ‘सेनको गोल्ड एंड डायमंड्स’ के एमडी एवं सीईओ सुवंकर सेन का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, आयात शुल्क ऊंचे बने रहेंगे और कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी के आसार कम हैं।
सेन के अनुसार, यह अनिश्चितता अगले एक साल तक बरकरार रह सकती है। उनका अनुमान है कि ऊंचे दामों की वजह से मांग (वॉल्यूम) में 10-15 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है, लेकिन कीमतों में उछाल के कारण कुल बाज़ार मूल्य बढ़ा रहेगा। ऐसे में ग्राहकों का रुझान अब ‘लाइटवेट’ यानी हल्के वजन के कलात्मक आभूषणों की ओर अधिक होगा।
गौरतलब है कि सरकार ने हाल ही में बड़ा कदम उठाते हुए सोने और चांदी पर आयात शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 15 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, प्लैटिनम पर भी टैक्स 6.4 प्रतिशत से बढ़कर अब 15.4 प्रतिशत हो गया है। इस बदलाव का व्यापक असर सिक्कों और अन्य स्वर्ण-रजत वस्तुओं पर भी पड़ेगा। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के तहत, 13 मई से सामाजिक कल्याण अधिभार (SWS) और कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) में भी बढ़ोतरी की गई है।
यह सख्त फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आह्वान के बाद लिया गया है, जिसमें उन्होंने विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग और सोने की खरीद जैसे खर्चों को फिलहाल टालने का सुझाव दिया था। आंकड़ों पर नज़र डालें तो, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का स्वर्ण आयात मूल्य के आधार पर 24 प्रतिशत की छलांग लगाकर 71.98 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, हालांकि मात्रा के लिहाज से इसमें 4.76 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
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