अमरीकी टैरिफ की अग्निपरीक्षा: चीन का तीखा जवाब और विश्व बाज़ार में हलचल
नई दिल्ली: दुनिया की दो महाशक्तियों, अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक जंग अब एक नए, खतरनाक मोड़ पर आ पहुंची है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर आर्थिक हथियारों का ऐसा प्रहार किया है, जिसने वैश्विक बाज़ार को झकझोर कर रख दिया है। ट्रंप ने सभी चीनी वस्तुओं पर 100% तक के नए टैरिफ की घोषणा कर दी है, जिसका सीधा मतलब है कि चीन से आने वाला हर सामान अब दोगुना महंगा हो जाएगा। इस अभूतपूर्व कदम के जवाब में, चीन ने अमरीका के “डबल स्टैंडर्ड” पर कड़ा प्रहार करते हुए, कड़े पलटवार की चेतावनी दी है।
चीन का पलटवार: “व्यापार युद्ध से हम डरते नहीं”
ट्रंप के टैरिफ के ऐलान के तुरंत बाद, चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने आग उगलता बयान जारी किया। मंत्रालय ने अमरीका के इस कदम को “डबल स्टैंडर्ड” का एक स्पष्ट उदाहरण बताते हुए, बीजिंग पर बढ़ते आर्थिक दबाव की कड़ी निंदा की। मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा, “हर मोड़ पर ऊंचे टैरिफ की धमकी देना चीन के साथ बातचीत का सही तरीका नहीं है।” चीन ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वे व्यापार युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अगर अमरीका अपनी हठधर्मिता पर अड़ा रहा, तो चीन अपने हितों की रक्षा के लिए “कड़े कदम” उठाने से नहीं हिचकिचाएगा।
1 नवंबर: टैरिफ का तूफ़ान
ट्रंप की घोषणा के अनुसार, 1 नवंबर से सभी चीनी उत्पादों पर 100% अतिरिक्त टैरिफ लागू होंगे। इसका अर्थ है कि चीनी वस्तुओं पर कुल अमरीकी टैरिफ लगभग 130% तक पहुंच जाएगा, जो दशकों में सबसे ऊंचा स्तर है। ट्रंप का दावा है कि चीन द्वारा दुर्लभ-पृथ्वी खनिजों (Rare Earth Elements) पर लगाए गए निर्यात प्रतिबंध “अत्यधिक आक्रामक” और “शत्रुतापूर्ण” हैं। इसी के जवाब में, अमरीका ने महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर और तकनीकी उत्पादों पर भी नए निर्यात नियंत्रण थोप दिए हैं।
बीजिंग का बचाव: “हमारे नियंत्रण वैध हैं”
ट्रंप के आरोपों का खंडन करते हुए, चीन ने अपने निर्यात नियंत्रण उपायों का जोरदार बचाव किया है। बीजिंग का कहना है कि उनके कदम वैध हैं और इनका उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना है। चीन ने यह भी संकेत दिया है कि वह “निर्यात नियंत्रण पर बातचीत और सहयोग बढ़ाने” के लिए तैयार है। वहीं, चीन ने अमरीका पर सितंबर से लगातार आर्थिक दबाव बढ़ाने का आरोप लगाया, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक वार्ता का माहौल बिगड़ा है।
ट्रंप का गुस्सा: “चीन दुनिया को बंदी बना रहा है”
ट्रंप ने तीखे शब्दों में बीजिंग पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन दुर्लभ पृथ्वी खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला पर अपने प्रभुत्व का इस्तेमाल दुनिया को “बंधक” बनाने के लिए कर रहा है। राष्ट्रपति ने कहा, “चीन बहुत आक्रामक होता जा रहा है।” फिलहाल अमरीकी टैरिफ 30% है, जबकि चीन अमरीकी उत्पादों पर 10% शुल्क लगाता है। लेकिन 100% टैरिफ की घोषणा ने इस लड़ाई को सीधे व्यापार युद्ध के अगले चरण में धकेल दिया है।
अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि यह टैरिफ युद्ध न केवल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को गंभीर झटका देगा, बल्कि अमरीका, एशिया और यूरोप के बाजारों को भी प्रभावित करेगा। विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स, स्व-ऊर्जा और टेक्नोलॉजी जैसे उद्योगों में उत्पादन में देरी और लागत में वृद्धि की संभावना है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी और बाज़ार में अनिश्चितता का माहौल बना रहेगा। इस बढ़ते तनाव के बीच, ट्रंप के चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने वाली APEC बैठक में शामिल होने पर भी संदेह के बादल मंडराने लगे हैं।
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