बिहार का चुनावी रण: महागठबंधन में सीटों के बंटवारे पर घमासान, 12 सीटों पर घमासान!
बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए नामांकन प्रक्रिया समाप्त होते ही, राज्य की सियासत गरमा गई है। सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन जहां अपनी चुनावी तैयारियों में जुटा है, वहीं विपक्षी महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर भारी खींचतान मची हुई है। हालत यह है कि महागठबंधन के सहयोगी दल कई सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकने को तैयार हैं, जिससे विपक्षी वोटों के बंटवारे का खतरा मंडराने लगा है।
12 सीटों पर सीधा मुकाबला!
महागठबंधन के भीतर असहमति के चलते राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) जैसी पार्टियां वैशाली, सुल्तानगंज और बछवाड़ा सहित कुल 12 सीटों पर आमने-सामने होंगी। यह अनिश्चितता 23 अक्टूबर को उम्मीदवारों द्वारा नाम वापस लेने की अंतिम तिथि तक बनी रह सकती है।
ये 12 सीटें हैं जहां महागठबंधन के सहयोगी एक-दूसरे को चुनौती देंगे:
- बछवाड़ा: अवधेश कुमार राय (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी) बनाम शिव प्रकाश गरीब दास (कांग्रेस)
- नरकटियागंज: दीपक यादव (राष्ट्रीय जनता दल) बनाम शाश्वत केदार पांडे (कांग्रेस)
- बाबूबरही: बिंदु गुलाब यादव (विकासशील इंसान पार्टी) बनाम अरुण कुमार सिंह कुशवाहा (राष्ट्रीय जनता दल)
- वैशाली: संजीव सिंह (कांग्रेस) बनाम अजय कुमार कुशवाहा (राष्ट्रीय जनता दल)
- राजा पाकर: प्रतिमा कुमारी दास (कांग्रेस) बनाम मोहित पासवान (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी)
- कहलगांव: रजनीश भारती (राष्ट्रीय जनता दल) बनाम प्रवीण सिंह कुशवाहा (कांग्रेस)
- बिहारशरीफ: ओमैर खान (कांग्रेस) बनाम शिव कुमार यादव (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी)
- सिकंदरा: विनोद कुमार चौधरी (कांग्रेस) बनाम उदय नारायण चौधरी (राष्ट्रीय जनता दल)
- चैनपुर: बाल गोविंद बिंद (विकासशील इंसान पार्टी) बनाम बृज किशोर बिंद (राष्ट्रीय जनता दल)
- सुल्तानगंज: ललन कुमार (कांग्रेस) बनाम चंदन कुमार सिन्हा (राष्ट्रीय जनता दल)
- करगहर: संतोष कुमार मिश्रा (कांग्रेस) बनाम महेंद्र प्रसाद गुप्ता (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी)
- वारसलीगंज: अनिता देवी महतो (राष्ट्रीय जनता दल) बनाम सतीश कुमार (कांग्रेस)
कांग्रेस की 70 सीटों की मांग, राजद का 52-55 का प्रस्ताव
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने कम से कम 70 सीटों की मांग की थी, लेकिन राजद ने उसे केवल 52 से 55 सीटों का प्रस्ताव दिया, जिससे दोनों प्रमुख सहयोगियों के बीच मतभेद गहरा गए। वहीं, वाम दलों ने 2020 के विधानसभा चुनावों में अपने प्रदर्शन का हवाला देते हुए 40 सीटों की मांग की थी, जबकि भाकपा माले ने 12, भाकपा ने 2 और माकपा ने भी 2 सीटें जीती थीं। मुकेश सहनी की वीआईपी ने भी 40 सीटों की मांग रखी थी, जिस पर बाद में 15 सीटों पर समझौता हुआ। वीआईपी को 2025 के बिहार चुनाव जीतने पर उपमुख्यमंत्री पद का वादा भी किया गया है।
एनडीए के लिए संजीवनी!
महागठबंधन के सहयोगियों के बीच 12 सीटों पर सीधा मुकाबला होने से सत्तारूढ़ एनडीए को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। विपक्षी वोटों के इस बिखराव का लाभ उठाकर एनडीए अपनी चुनावी स्थिति मजबूत कर सकता है।
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