थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर फिर भड़की आग: कंटीले तार बने जंग का मैदान, 20 से ज्यादा घायल
पड़ोसी देशों के बीच सीमा विवाद कितना गंभीर हो सकता है, इसकी एक बानगी इस हफ्ते थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर देखने को मिली। बुधवार को अचानक हालात बिगड़ गए, जहाँ पत्थरबाजी, आंसू गैस और रबर की गोलियों के चलने से 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। दोनों देश एक-दूसरे पर आरोप मढ़ रहे हैं।
कंबोडिया के सूचना मंत्री नेथ फेकत्रा का दावा है कि इस भिड़ंत में 23 कंबोडियाई नागरिक घायल हुए, जिनमें एक सैनिक और एक बौद्ध भिक्षु भी शामिल हैं। उन्होंने थाई अधिकारियों पर आम लोगों पर आंसू गैस, रबर की गोलियां और विस्फोटक उपकरण इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
थाईलैंड का पक्ष – “हम पर हुआ हमला”
वहीं, थाई सेना ने सफाई देते हुए कहा कि वे साकेओ प्रांत में सीमा पर कंटीले तार लगा रहे थे, तभी करीब 200 कंबोडियाई नागरिक जमा होकर विरोध करने लगे। थाई सेना के अनुसार, प्रदर्शनकारियों द्वारा पत्थरबाजी के बाद ही उन्हें आंसू गैस और रबर की गोलियां चलानी पड़ीं। समाचार एजेंसी एएफपी ने थाई सेना के हवाले से यह भी कहा कि “कंबोडियाई लोग हमारी जमीन पर घुसे और कंबोडियाई प्रशासन ने उन्हें रोका तक नहीं। यह युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन है।”
**कंबोडिया का जवाब – “लड़ाई हमारी जमीन पर हुई”**
कंबोडिया के सूचना मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि यह पूरा टकराव बांतेई मेनचेय प्रांत में, यानी कंबोडियाई सीमा के भीतर हुआ। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक कंबोडियाई नागरिक कथित तौर पर आंसू गैस के गोले को उठाकर थाई अधिकारियों की ओर फेंक रहा है।
दरअसल, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच 817 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है, जिसका नक्शा 1907 में फ्रांस द्वारा तैयार किया गया था जब कंबोडिया उसका उपनिवेश था। हालांकि, सीमा के कई हिस्से आज भी अस्पष्ट हैं। थाईलैंड का दावा है कि विवादित इलाका उसके बान नोंग या कैव गांव (साकेओ प्रांत) का है, जबकि कंबोडिया का कहना है कि यह उसका प्रेय चान गांव (बांतेई मेनचेय प्रांत) है। रॉयटर्स के अनुसार, पिछले महीने थाईलैंड द्वारा यहाँ कंटीले तार का बाड़ लगाने के बाद से दोनों पक्षों के लोग विरोध कर रहे हैं।
**जुलाई की भीषण लड़ाई की यादें ताज़ा, सीमा पर फिर तनाव**
यह घटना जुलाई 2025 की भीषण लड़ाई की यादें ताज़ा कर देती है, जब इसी इलाके में पांच दिनों तक चले संघर्ष में कम से कम 48 लोगों की मौत हुई थी और लाखों लोग बेघर हो गए थे। 28 जुलाई को मलेशिया की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों के बीच युद्धविराम हुआ था, लेकिन अब सितंबर में सीमा पर तनाव फिर से बढ़ गया है।
अवेयर मीडिया न्यूज़ वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है।
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