खुशियों का त्योहार दिवाली, और 9 दिनों की बंपर छुट्टी! प्राइवेट कंपनी के इस कदम ने मचाया सोशल मीडिया पर धमाल
भाग-दौड़ भरी जिंदगी और प्राइवेट नौकरी के चंगुल में फंसे बड़े शहरों के लोगों के लिए त्योहारों पर अपने परिवार के साथ समय बिताना किसी सपने से कम नहीं। अक्सर, फेस्टिवल पर भी काम का बोझ इतना होता है कि वर्क फ्रॉम होम के नाम पर हमें अपनी निजी जिंदगी से समझौता करना पड़ता है। मीटिंग्स, कॉल्स और फाइलों के बीच वो अनमोल पल कब निकल जाते हैं, पता ही नहीं चलता। जब इन सब से फुर्सत मिलती है, तो घरवाले और दोस्त नाराज बैठे होते हैं। आखिर, यही तो वो मौके होते हैं जब हम अपनी लाइफ को थोड़ा ब्रेक दे पाते हैं, वरना तो दिनभर ऑफिस की भागमभाग में ही बीत जाता है।
ऐसे में, अगर आपको पता चले कि कोई ऐसी कंपनी भी है जो अपने कर्मचारियों को दिवाली पर पूरे 9 दिन की छुट्टी दे रही है, तो यकीन मानिए, आपका रिएक्शन भी सोशल मीडिया यूजर्स जैसा ही होगा। लोग यही कह रहे हैं, “कंपनी नहीं, तू देवता है रे बाबा!”
वर्क-लाइफ बैलेंस: छुट्टियों का महत्व
आज के दौर में वर्क-लाइफ बैलेंस को बनाए रखना बेहद जरूरी है। काम के बढ़ते दबाव से शरीर और मन दोनों थक जाते हैं। इससे निपटने के लिए लोग कई तरीके अपनाते हैं, जैसे ऑफिस के बाद परिवार के साथ समय बिताना, दोस्तों से बातचीत करना, फिल्में देखना या वीकेंड पर कहीं घूमने जाना।
छुट्टियों का ‘अकाल’ और एक उम्मीद की किरण
लेकिन इन सब के लिए सबसे जरूरी चीज है – छुट्टी! कई कंपनियां तो ऐसे छुट्टी देती हैं जैसे कोई ‘जीवनदान’ दे रही हों। हालांकि, कहावत है न, ‘सब एक जैसे नहीं होते’। दिल्ली की एक ऐसी ही प्राइवेट कंपनी ने दिवाली पर अपने कर्मचारियों को 9 दिनों की छुट्टी देकर सबको चौंका दिया है। सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है।
स्टाफ का प्यार, संस्थापक के लिए
इस पोस्ट की शुरुआत हुई लिंक्डइन पर, जहां कंपनी के एक कर्मचारी ने अपने संस्थापक और सीईओ की जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी कंपनी हमेशा अपने स्टाफ का ख्याल रखती है और इस दिवाली, परिवार के साथ समय बिताने के लिए सबको 9 दिनों की छुट्टी दी गई है। कंपनी ने एक मजेदार अंदाज में कर्मचारियों से कहा कि इन छुट्टियों में ईमेल से दूर रहें और पूरी तरह से इसका आनंद लें। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह छुट्टी हर साल मिलेगी या इस बार की दिवाली के लिए एक खास तोहफा है।
सोशल मीडिया पर तालियों की गूंज
प्राइवेट कंपनी के इस फैसले पर कर्मचारियों और आम लोगों ने भी खूब प्यार बरसाया है। लोगों ने इसे ‘मानव-केंद्रित’ फैसला बताते हुए कंपनी की सराहना की है। वहीं, कुछ लोग मजाकिया अंदाज में कह रहे हैं, “कंपनी नहीं, देवता बन गई!”
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