दिवाली से पहले भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक ऐसा ‘पटाखा’ दागा है, जिसकी गूंज सीधे दुश्मन देशों तक सुनाई दे रही है। यह कोई आम आतिशबाजी नहीं, बल्कि भारत की स्वदेशी ‘प्रलय’ मिसाइल है। बीते 5 नवंबर को ओडिशा तट के पास इस खतरनाक मिसाइल का सफल उड़ान परीक्षण किया गया। खास बात यह है कि यह परीक्षण केवल तकनीकी प्रदर्शन नहीं, बल्कि भारतीय सेना में ‘प्रलय’ के शामिल होने की उल्टी गिनती शुरू होने का बड़ा संकेत है। देखा जाये तो भारत अब एक ऐसा अचूक मिसाइल जखीरा तैयार कर रहा है, जो युद्ध के मैदान में दुश्मन के एयरबेस, सैन्य ठिकानों, कमांड सेंटर और हथियारों के जखीरे को पलक झपकते ही नेस्तनाबूद करने की ताकत रखता है।
प्रलय मिसाइल क्यों है इतनी खतरनाक?
हम आपको बता दें कि प्रलय एक स्वदेशी सतह से सतह पर मार करने वाली क्वासी-बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता लगभग 150 से 500 किलोमीटर तक है। यह पारंपरिक विस्फोटक वारहेड ले जाने में पूरी तरह सक्षम है और अलग-अलग प्रकार के लक्ष्यों के हिसाब से इसके पेलोड में आसानी से बदलाव किया जा सकता है। इसकी पेलोड क्षमता लगभग 350 से 1,000 किलोग्राम तक बताई जाती है।
इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी उड़ान का अचूक तरीका है। सामान्य बैलिस्टिक मिसाइलें एक निश्चित घुमावदार रास्ते पर चलती हैं, जिससे दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए उनकी दिशा भांपना आसान होता है। लेकिन ‘प्रलय’ उड़ान के दौरान अपना रास्ता बदल सकती है और जरूरत के मुताबिक दिशा में बदलाव कर सकती है। यही वजह है कि इसे इंटरसेप्ट करना दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम के लिए लोहे के चने चबाने जैसा साबित होगा। ठोस ईंधन से चलने वाली यह मिसाइल मोबाइल लॉन्चर से दागी जाती है, जिससे इसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना और बिजली की तेजी से तैनात करना बेहद आसान हो जाता है।
साथ ही, इसका यह परीक्षण इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि यह कोई शुरुआती विकास परीक्षण नहीं, बल्कि सेना की कड़ी जरूरतों के मुताबिक किया जा रहा ‘यूजर इवैल्यूएशन ट्रायल’ का हिस्सा था। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, परीक्षण के सभी निर्धारित लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरे हुए हैं। DRDO के हैदराबाद स्थित ‘रिसर्च सेंटर इमारत’ ने अन्य प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर इसे विकसित किया है, जबकि भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने इसका उत्पादन किया है। रक्षा मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि इस सफल परीक्षण के बाद मिसाइल को सेना में शामिल करने की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में है। इसका सीधा अर्थ यह है कि भारत अब केवल मिसाइल विकसित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे वास्तविक युद्ध के मैदान में उतारने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पाकिस्तान और चीन के लिए क्यों बढ़ेगी चुनौती?
हम आपको यह भी बता दें कि ‘प्रलय’ की तैनाती से भारत की पारंपरिक सैन्य मारक क्षमता में एक ऐतिहासिक बदलाव आने वाला है। पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध के हालात में यह मिसाइल सीमा के भीतर सुरक्षित समझे जाने वाले एयरबेस, सैन्य ठिकानों, हथियारों के डिपो, रडार प्रतिष्ठानों और कमांड सेंटर को नेस्तनाबूद करने का अचूक हथियार साबित होगी। इसकी 500 किलोमीटर तक की मारक क्षमता पाकिस्तान के कई अहम सामरिक ठिकानों को सीधे अपनी जद में लाती है।
साथ ही, चीन के संदर्भ में भी इसका महत्व किसी भी तरह से कम नहीं है। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास ड्रैगन ने जिस तरह बड़े पैमाने पर सैन्य ढांचे, एयरबेस और मिसाइल प्रणालियों का जाल बिछाया है, उसे देखते हुए ‘प्रलय’ जैसी मोबाइल और सटीक मारक क्षमता वाली मिसाइल भारत को एक अजेय सामरिक बढ़त देगी। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे परमाणु हथियार के बजाय पारंपरिक वारहेड के साथ इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन किया गया है। यानी, किसी भी सीमित युद्ध की स्थिति में भी भारत के पास दुश्मन के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर करारा प्रहार करने का एक बेहद प्रभावी विकल्प मौजूद होगा।
DRDO के दूसरे परीक्षण भी बदल रहे हैं भारत की ताकत
इसके अलावा, ‘प्रलय’ का यह परीक्षण अचानक सामने आई कोई इकलौती सफलता नहीं है। DRDO पिछले कुछ समय से मिसाइल तकनीक के हर मोर्चे पर रिकॉर्ड तोड़ रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। जुलाई 2025 में ‘प्रलय’ के दो लगातार उड़ान परीक्षण किए गए थे, जिनमें इसकी न्यूनतम और अधिकतम दूरी तक मार करने की क्षमता को बारीकी से परखा गया था। दिसंबर 2025 में इसका ‘सैल्वो परीक्षण’ भी किया गया, जिसमें एक ही मोबाइल लॉन्चर से लगातार दो मिसाइलें दागकर यह साबित कर दिया गया कि यह युद्ध के मैदान में कम समय के भीतर एक साथ कई लक्ष्यों को तबाह कर सकती है। इसके अलावा, मई 2026 में DRDO ने अत्याधुनिक ‘अग्नि मिसाइल’ का MIRV तकनीक के साथ सफल परीक्षण किया था। हम आपको बता दें कि MIRV का मतलब है एक ही मिसाइल से अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ कई परमाणु वारहेड बरसाने की क्षमता। इस मील के पत्थर ने भारत की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता को लोहे जैसा मजबूत बना दिया है।
साथ ही, आने वाले दिनों में DRDO के सामने ‘प्रलय’ को पूरी तरह सेना का हिस्सा बनाने, इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन और इसकी परिचालन क्षमता को और धार देने की जिम्मेदारी है। इसके साथ ही अग्नि, हाइपरसोनिक हथियारों, एयर डिफेंस और लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों पर चल रहे प्रोजेक्ट्स भारत के अजेय भविष्य की ठोस नींव रख रहे हैं।
बहरहाल, ‘प्रलय’ की यह सफलता भारत की रक्षा रणनीति में एक ऐतिहासिक और बड़े बदलाव का स्पष्ट संकेत है। भारत अब केवल दुश्मन के हमलों का बचाव करने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसके घर में घुसकर सटीक तबाही मचाने की कुवत रखता है। पिनाका जैसे विध्वंसक रॉकेट सिस्टम से लेकर ‘प्रलय’ और ‘अग्नि’ जैसी महाबली मिसाइलों तक, DRDO की यह उपलब्धियां चीख-चीख कर कह रही हैं कि भारतीय सैन्य शक्ति का स्वदेशीकरण अब अपने निर्णायक और स्वर्णिम दौर में पहुंच चुका है। दिवाली से पहले ‘प्रलय’ का यह गरजता हुआ परीक्षण इसी बदलती और आक्रामक भारतीय सैन्य ताकत का सबसे नया और धमाकेदार सबूत है।
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