2025 सूर्य ग्रहण: क्या करें, क्या न करें – गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष जानकारी

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
4 Min Read
2025 सूर्य ग्रहण: क्या करें, क्या न करें - गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष जानकारी
Surya Grahan 2025 Time: आज साल का अंतिम सूर्यग्रहण, नोट करें टाइम, क्या लगेगा सूतक? | Surya Grahan 2025: solar eclipse harmful for pregnant women? kya kare Gharbvati Mahilaye, Know Do-donts in Hindi

सूर्य ग्रहण 2025: साल का आखिरी ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा, जानें समय और ज्योतिषीय महत्व

नई दिल्ली: आज, 21 सितंबर 2025 को साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण होगा जो भारत में प्रभावी नहीं होगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। यह खगोलीय घटना आज रात 10 बजकर 39 मिनट से शुरू होकर 22 सितंबर की सुबह 3 बजकर 29 मिनट तक जारी रहेगी। ग्रहण का चरमकाल 22 सितंबर को 01 बजकर 11 मिनट पर होगा।

यह सूर्य ग्रहण ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अंटार्कटिका के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। हालांकि, भारत में बैठे लोग इस अद्भुत खगोलीय घटना को नासा के एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट और ऑनलाइन लाइव स्ट्रीम के माध्यम से देख सकेंगे। ग्रहण का गोचर कन्या राशि और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में होगा।

ज्योतिषीय प्रभाव और धार्मिक मान्यताएं

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, सूर्य ग्रहण के दौरान ग्रहों की चाल में परिवर्तन होता है, जिसका सीधा असर मानव जीवन पर पड़ता है। इसी कारणवश, ग्रहण काल को शुभ कार्यों या पूजा-पाठ के लिए वर्जित माना जाता है।

सूर्य ग्रहण: एक वैज्ञानिक और धार्मिक परिप्रेक्ष्य

पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य का संरेखण
सूर्य ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और चंद्रमा, सूर्य की किरणों को पृथ्वी तक पहुँचने से अवरुद्ध कर देता है। यह एक वैज्ञानिक रूप से विस्मयकारी और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण घटना है।

सूर्य ग्रहण क्यों होता है?
सूर्य ग्रहण का मुख्य कारण चंद्रमा की पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा और पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा है। अमावस्या के दिन जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, तो उसकी छाया पृथ्वी पर पड़ती है, जिससे सूर्य कुछ समय के लिए आंशिक या पूर्ण रूप से ढक जाता है।

सूर्य ग्रहण के प्रकार
सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं:

  • पूर्ण सूर्य ग्रहण: जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढक लेता है।
  • आंशिक सूर्य ग्रहण: जब सूर्य का केवल एक हिस्सा ही चंद्रमा द्वारा ढका जाता है।
  • वलयाकार सूर्य ग्रहण: जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से नहीं ढक पाता, जिससे सूर्य एक अंगूठी की तरह दिखाई देता है।

सूर्य ग्रहण का प्राचीन इतिहास
सूर्य ग्रहण का उल्लेख हजारों साल पुराने ग्रंथों में मिलता है। ऋग्वेद और अथर्ववेद में सूर्य ग्रहण का वर्णन मिलता है, जहां इसे ‘राहु द्वारा सूर्य को ढकना’ कहा गया है। महान खगोलशास्त्री आर्यभट्ट ने भी सूर्य ग्रहण के वैज्ञानिक कारणों को स्पष्ट किया था।

सूर्य ग्रहण का धार्मिक महत्व

  • ग्रहण काल के दौरान धार्मिक अनुष्ठान, भोजन ग्रहण करना और शुभ कार्य करना वर्जित होता है।
  • इस अवधि में मंत्र जाप, ध्यान और स्नान को फलदायी माना जाता है।
  • ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल से स्नान और दान-पुण्य करने से इसके नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है।

अस्वीकरण: यह लेख किसी भी प्रकार के अंधविश्वास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नहीं है। दी गई जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। वनइंडिया प्रदान की गई किसी भी जानकारी की पुष्टि नहीं करता है, इसलिए किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले कृपया किसी जानकार ज्योतिष या पंडित से सलाह अवश्य लें।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है।Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *