अहोई अष्टमी 2025: पुत्रों की मंगलकामना का पावन व्रत, तारों से सजेगा हर आंगन
नई दिल्ली: हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला अहोई अष्टमी का व्रत, माताओं के स्नेह और समर्पण का एक अनूठा पर्व है। यह व्रत विशेष रूप से पुत्रों की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ रखा जाता है। करवा चौथ के चार दिनों के बाद आने वाला यह व्रत, मातृत्व की भावना को और गहराई से संजोता है।
अहोई माता की पूजा: संतान के लिए स्नेह का बंधन
अहोई अष्टमी के दिन, माताएं श्रद्धापूर्वक निर्जला व्रत रखती हैं और ‘अहोई माता’ की विधि-विधान से पूजा करती हैं। इस पावन दिन, घर-परिवार में संतान के सुख और उनके उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना की जाती है। व्रत का समापन सूर्यास्त के बाद तारों को जल अर्पित करने के साथ होता है। यह रस्म बच्चों के भविष्य को तारों की तरह उज्ज्वल और सुरक्षित बनाने की आशाओं से ओत-प्रोत होती है। इसके पश्चात, चंद्रमा को गुड़ की खीर का भोग लगाकर व्रत खोला जाता है, और घर के बच्चों को भी प्रसाद के रूप में यह खीर खिलाई जाती है।
तारों को अर्घ्य: भविष्य की ज्योति
अहोई अष्टमी पर तारों को जल अर्पित करने की परंपरा का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। यह मान्यता है कि जिस प्रकार आकाश में तारे निरंतर चमकते रहते हैं, उसी प्रकार घर के सभी बालकों का जीवन भी प्रकाशमय, सफल और सुरक्षित रहे। तारों को माता अहोई का वंशज माना जाता है, इसलिए उनके प्रति श्रद्धा भाव से की गई पूजा, संतान की रक्षा और समृद्धि का आशीर्वाद दिलाती है।
अवेयर मीडिया नेटवर्क
अहोई अष्टमी व्रत का धार्मिक सार
अहोई अष्टमी का व्रत संतान के सुखमय जीवन और लंबी आयु के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस व्रत को धारण करने से बच्चों को हर प्रकार की विपदाओं से सुरक्षा मिलती है और उनका भविष्य मंगलमय बनता है। माता अहोई को बच्चों के सौभाग्य की रक्षक के रूप में पूजा जाता है। इस व्रत के अनुष्ठान से घर में सुख-शांति बढ़ती है और परिवार के बच्चे शिक्षा तथा अपने करियर में उत्तरोत्तर प्रगति करते हैं।
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व्रत की विधि और प्रसाद: आस्था का संगम
यह व्रत सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक, बिना कुछ खाए-पिए किया जाता है। व्रत का पारण तारों को जल अर्पित करने के उपरांत ही होता है। माताएं श्रद्धापूर्वक चंद्रमा को गुड़ की खीर का भोग लगाती हैं और तत्पश्चात घर के बच्चों को प्रसाद स्वरूप खीर खिलाती हैं। यह व्रत, माँ के असीम प्रेम और अपनी संतान के प्रति उसकी अनवरत सुरक्षा की भावना का प्रतीक है।
अहोई अष्टमी 2025: महत्वपूर्ण तिथियां और अनुष्ठान
- अहोई अष्टमी की तिथि: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 13 अक्टूबर 2025 को रात 12:24 बजे से प्रारंभ होकर, अगले दिन 14 अक्टूबर 2025 को सुबह 11:09 बजे तक मान्य रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर 2025 को ही मनाया जाएगा।
अहोई अष्टमी से जुड़े प्रमुख प्रश्न
- अहोई अष्टमी का व्रत कैसे रखें?
व्रती माताएं निर्जला उपवास रखती हैं और अहोई माता की पूजा के पश्चात, रात्रि में तारों को जल अर्पित करके व्रत का पारण करती हैं। - अहोई माता कौन हैं?
अहोई माता को संतान की रक्षक, सौभाग्य प्रदायिनी और कल्याणकारी देवी माना जाता है। - अहोई अष्टमी के दिन क्या खा सकते हैं?
व्रत रखने वाली माताएं दिन में हल्का, व्रत-उपयुक्त आहार जैसे फल या सूखे मेवे ले सकती हैं। - क्या अहोई अष्टमी के व्रत में चाय पी सकते हैं?
नहीं, अहोई अष्टमी का व्रत निर्जला रखा जाता है, इसलिए चाय या कॉफी का सेवन वर्जित है।
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