करवा चौथ: प्रेम, आस्था और अनमोल बंधन का पर्व, जानें संपूर्ण विधि और शुभ मुहूर्त
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि, हर साल एक ऐसे पावन अवसर का साक्षी बनती है जब सुहागिन स्त्रियां अपने जीवनसाथी के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। यह दिन है करवा चौथ का, जो प्रेम, समर्पण और अटूट आस्था का प्रतीक है।
इस पवित्र दिन, महिलाएं श्रद्धापूर्वक करवा माता की पूजा करती हैं और रात में चंद्रोदय के पश्चात ही अपने व्रत का पारण करती हैं। इस वर्ष, यह शुभ पर्व 10 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
करवा चौथ का व्रत केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और अनुष्ठानों का एक अनूठा संगम है। व्रत के दौरान महिलाओं को विशेष सावधानियों का पालन करना होता है, क्योंकि एक छोटी सी चूक भी व्रत के पुण्य फल को कम कर सकती है। इसलिए, व्रत आरंभ करने से पूर्व इसके महत्व और नियमों को जानना अत्यंत आवश्यक है।
करवा चौथ 2023: तिथियां और शुभ समय का विशेष संयोग
- व्रत की तिथि: 10 अक्टूबर, 2023
- चतुर्थी तिथि का आरंभ: 10 अक्टूबर, रात 10:54 बजे
- चतुर्थी तिथि का समापन: 11 अक्टूबर, शाम 7:38 बजे
- पूजा का शुभ मुहूर्त: सुबह 5:16 बजे से शाम 6:29 बजे तक
- चंद्रोदय (चंद्रमा के दर्शन का समय): व्रत तोड़ने हेतु, चंद्रमा शाम 7:42 बजे दिखाई देगा।
करवा चौथ व्रत के महत्वपूर्ण नियम: पूर्ण फल प्राप्ति हेतु
करवा चौथ का व्रत अत्यंत निष्ठा और कठोर नियमों के साथ किया जाता है। इन नियमों का विधिवत पालन न करने पर व्रत का पूरा फल प्राप्त नहीं होता या यह खंडित हो सकता है।
- निर्जला व्रत का संकल्प: व्रत का आरंभ सूर्योदय से पूर्व सरगी खाकर किया जाता है। इसके पश्चात, चंद्रोदय तक जल की एक घूंट या किसी भी प्रकार के अन्न का सेवन वर्जित होता है। यदि अनजाने में भी अन्न-जल ग्रहण हो जाए, तो व्रत खंडित माना जाता है।
- चंद्रोदय उपरांत ही पारण: व्रत की पूर्णता चंद्रोदय के पश्चात, चंद्रमा को विधि-विधान से अर्घ्य देकर और पति के हाथों जल ग्रहण करने से होती है। चंद्र दर्शन और अर्घ्य से पूर्व व्रत का पारण करने से व्रत का संपूर्ण लाभ नहीं मिलता।
- दिवस में शयन वर्जित: शास्त्रों के अनुसार, करवा चौथ के दिन दोपहर या दिन के समय सोना वर्जित है। ऐसी मान्यता है कि इससे व्रत का पुण्य फल कम हो जाता है।
- नुकीली वस्तुओं से दूरी: इस पावन दिन सुई, कैंची, चाकू या किसी भी प्रकार की धारदार/नुकीली वस्तु का प्रयोग करने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि यह व्रत के फल को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है और इसे अशुभ माना जाता है।
- सुहाग सामग्री का दान: विवाहित महिलाओं के लिए इस दिन सुहाग की वस्तुएं (जैसे सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी) दान करना अत्यंत शुभ होता है। हालांकि, अपनी स्वयं की प्रयुक्त या मुख्य सुहाग सामग्री को किसी को भी दान न करें। ऐसा करना सौभाग्य को कम करने वाला माना जाता है।
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