मुख्यमंत्री साय का पारंपरिक वैद्य सम्मेलन में उद्बोधन: हमारी सांस्कृतिक धरोहर, हमारी पारंपरिक चिकित्सा

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मुख्यमंत्री साय का पारंपरिक वैद्य सम्मेलन में उद्बोधन: "हमारी सांस्कृतिक धरोहर, हमारी पारंपरिक चिकित्सा"
Chhattisgarh News

छत्तीसगढ़ में परंपरागत वैद्य सम्मेलन: प्राचीन ज्ञान का संगम, आधुनिक विकास की ओर

रायपुर: राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय परंपरागत वैद्य सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस गरिमामयी आयोजन में राज्य के विभिन्न जिलों से आए वैद्यों का जमावड़ा लगा, जिन्होंने मुख्यमंत्री का पारंपरिक जड़ी-बूटी की माला पहनाकर स्वागत किया। सम्मेलन का मुख्य आकर्षण औषधीय पौधों की प्रदर्शनी रही, जिसका मुख्यमंत्री ने उत्साहपूर्वक अवलोकन किया।

पंजीकृत वैद्यों को मिलेगा प्रशिक्षण और प्रमाण पत्र: मुख्यमंत्री साय का भरोसा

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संबोधन में राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई कि सभी पंजीकृत वैद्यों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाएगा और उन्हें प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दस्तावेज़ों की कमी के कारण किसी भी वैद्य को कठिनाई का सामना न करना पड़े। यह पहल राज्य की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को मजबूती प्रदान करेगी।

पद्मश्री हेमचंद मांझी: सुदूर अंचल से विश्व तक फैला ज्ञान

सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने पद्मश्री हेमचंद मांझी का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मांझी जी सुदूर अंचल में रहकर भी अपने पारंपरिक ज्ञान से गंभीर बीमारियों का उपचार करते हैं, और तो और अमेरिका से भी लोग उनके उपचार के लिए आते हैं। यह हम सबके लिए अत्यंत गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री ने वैद्य परंपरा को देश की प्राचीन और समृद्ध चिकित्सा पद्धति बताया। उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि भारत में लगभग 60 से 70 हजार वैद्य सक्रिय हैं, जिनमें से लगभग 1500 वैद्य छत्तीसगढ़ में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

हर्बल स्टेट छत्तीसगढ़: औषधीय पौधों की अनमोल धरोहर

मुख्यमंत्री ने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को दी गई मान्यता का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ पूरे देश में एक “हर्बल स्टेट” के रूप में अपनी पहचान बना चुका है, जहां डेढ़ हजार से अधिक औषधीय पौधे पाए जाते हैं। दुर्ग जिले के पाटन स्थित जामगांव में औषधीय पौधों से अर्क निकालने के लिए एक अत्याधुनिक कारखाना भी स्थापित किया गया है।

आयुष मंत्रालय का गठन: प्राकृतिक चिकित्सा को राष्ट्रव्यापी बढ़ावा

मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा दे रही है और इस दिशा में कार्यों को गति देने के लिए एक पृथक आयुष मंत्रालय का गठन किया गया है। छत्तीसगढ़ में उच्च गुणवत्ता वाली जड़ी-बूटियों की उपलब्धता को देखते हुए, राज्य सरकार क्लस्टर आधारित मॉडल विकसित कर रही है ताकि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध जड़ी-बूटियों का अधिकतम उपयोग हो सके। सरकार का लक्ष्य स्थानीय वैद्यों को रोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, साथ ही औषधीय पौधों और वृक्षों के संरक्षण की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

सुषेण वैद्य से तुलना: परंपरागत वैद्यों का अमूल्य योगदान

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम ने समाज में वैद्यों के महत्वपूर्ण स्थान पर प्रकाश डाला। उन्होंने पद्मश्री हेमचंद मांझी की तुलना रामायण काल के सुषेण वैद्य से करते हुए कहा कि जिस प्रकार सुषेण वैद्य ने लक्ष्मण जी का उपचार किया था, उसी प्रकार छत्तीसगढ़ में मांझी जी दुर्लभ से दुर्लभ रोगों का सफल उपचार कर रहे हैं। उन्होंने परंपरागत वैद्यों के योगदान को मानव और पशु स्वास्थ्य दोनों के लिए अमूल्य बताया।

“नवरत्न योजना” और भविष्य की पहल

छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने बताया कि इस सम्मेलन में 1300 से अधिक वैद्यों का पंजीकरण हुआ है। उन्होंने “नवरत्न योजना” के तहत प्रदेशभर में हर्रा, बहेड़ा, आंवला, मुनगा जैसे नौ प्रकार के औषधीय गुणों वाले पौधे लगाने की पहल का भी उल्लेख किया।

वैद्यों का अनुभव: रोगों के जड़ से उपचार की कला

पद्मश्री हेमचंद मांझी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वैद्यों के पास किसी भी रोग को जड़ से समाप्त करने की कला होती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सही जानकारी और औषधियों के उचित संयोजन से वैद्य कई प्रकार के कैंसर का भी उपचार कर सकते हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री वी. श्रीनिवास राव ने इस बात पर जोर दिया कि उन आंतरिक क्षेत्रों में जहां आधुनिक चिकित्सा सेवाएं सुलभ नहीं हैं, वहां परंपरागत वैद्य अपने पूर्वजों के ज्ञान से लोगों की सेवा कर रहे हैं। इन वैद्यों को सशक्त बनाना और उनके ज्ञान का संरक्षण करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

सत्यनिष्ठा और गोपनीयता की शपथ, मशीनों का वितरण और पुस्तक विमोचन

मुख्यमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में, राज्यभर से आए वैद्यों ने अपने कर्तव्य के प्रति सत्यनिष्ठा और गोपनीयता की शपथ ली। इस अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा 25 वैद्यों को कच्ची औषधीय पिसाई मशीनें भी वितरित की गईं। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा प्रकाशित डॉ. देवयानी शर्मा की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक में दुर्ग वन वृत्त के परंपरागत वैद्यों द्वारा संरक्षित पारंपरिक उपचार पद्धतियों और औषधीय पौधों का बहुमूल्य संकलन है।

सम्मेलन को छत्तीसगढ़ आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के सीईओ श्री जे. ए. सी. एस. राव ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश चतुर्वेदी, आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति श्री प्रदीप कुमार पात्रा, प्रदेशभर से आए वैद्य गण तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। यह सम्मेलन न केवल छत्तीसगढ़ की समृद्ध पारंपरिक चिकित्सा विरासत का उत्सव था, बल्कि भविष्य में इसे संरक्षित और विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।


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