छठ महापर्व की धूम: गंगा घाटों पर तैयारियां तेज, कीचड़ और दलदल बनी बड़ी चुनौती
लोकआस्था के महापर्व छठ को लेकर बिहार में उल्लास का माहौल है, लेकिन पटना के गंगा घाटों की तस्वीर कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही है। गंगा के जलस्तर में आई भारी गिरावट ने घाटों को कीचड़ और दलदल से भर दिया है, जिससे नगर निगम और जिला प्रशासन के समक्ष व्रतियों के लिए सुरक्षित और सुलभ घाट तैयार करने की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। बंशी घाट से लेकर दीघा और दानापुर तक, रंगाई-पुताई का काम जहाँ एक ओर चल रहा है, वहीं दूसरी ओर नावों से रेत ढोकर दलदल को पाटने का प्रयास भी जारी है। प्रशासनिक निरीक्षणों का दौर जारी है, लेकिन समय तेजी से बीत रहा है।
बंशी घाट: गंदगी और कीचड़ का सामना, मिट्टी हटाना है मुख्य काम
बंशी घाट पर छठव्रतियों के लिए तैयारियां सबसे कठिन प्रतीत हो रही हैं। पूजा के बाद छोड़े गए सामान, प्लास्टिक और मिट्टी के बर्तन घाट पर कचरे का ढेर बना रहे हैं। गंगा का जलस्तर कम होने से घाट पर मोटी परत में कीचड़ जम गया है। नगर निगम की टीमें ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कर रही हैं, लेकिन असली चुनौती तो मिट्टी हटाकर घाट को समतल करने और बालू बिछाने की है। श्रमिकों का कहना है कि गंगा के लगातार घटते जलस्तर के कारण घाट दलदल में तब्दील हो रहा है, जिससे सफाई और निर्माण कार्य दोगुना मेहनत मांग रहा है।
कदम घाट: पानी के घटते स्तर से बढ़ता दलदल
कदम घाट पर गंगा का पानी अब सीढ़ियों से भी नीचे उतर गया है। जैसे-जैसे पानी कम हो रहा है, सीढ़ियों पर जमी मिट्टी और दलदल स्पष्ट दिखाई देने लगा है। दलदल को रोकने के लिए बालू के बोरे भरकर बैरिकेडिंग करने की योजना है, ताकि पानी की गहराई एक निश्चित स्तर तक ही रहे। घाट पर काम कर रहे लोगों का कहना है कि दलदल को साफ करने में समय लगेगा और बाकी तैयारियों की गति पानी के घटने की रफ्तार पर निर्भर करेगी।
कृष्णा घाट: रंग-रोगन जारी, सफाई का इंतजार
कृष्णा घाट पर वर्तमान में दीवारों को रंगने और रेलिंग को पेंट करने का काम चल रहा है। गंगा का पानी अभी भी सीढ़ियों तक है, जिसके कारण घाट की मुख्य सफाई और समतलीकरण का काम अभी शुरू नहीं हो पाया है। आने वाले कुछ दिनों में दीवारों पर छठ की महत्ता को दर्शाने वाले चित्र बनाने की योजना है, लेकिन वास्तविक सफाई और निर्माण कार्य गंगा के घटते जलस्तर के भरोसे टिका है।
प्रशासन का कड़ा रुख: दीघा से कलेक्ट्रेट घाट तक निरीक्षण, बैरिकेडिंग के आदेश
रविवार को प्रमंडलीय आयुक्त अनिमेष कुमार पराशर ने दीघा पाटीपुल घाट से कलेक्ट्रेट घाट तक पैदल निरीक्षण कर घाटों की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कटाव, ढलान और दलदल जैसी समस्याओं को देखते हुए अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए। सभी घाटों पर पांच फुट की गहराई वाले क्षेत्रों में बैरिकेडिंग, एप्रोच रोड की मरम्मत, वाच टावर का निर्माण और बाधाओं को हटाने का आदेश दिया गया। इस निरीक्षण में डीडीसी, एसडीओ, एडीएम आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।
नावों से रेत लाकर दलदल को समतल करने में जुटी टीमें
पटना सिटी के महाराज घाट, टेढ़ी घाट और हीरानंद घाट जैसे कई स्थानों पर दलदल को समतल करने के लिए गंगा के उस पार से नावों के माध्यम से रेत लाई जा रही है। प्रत्येक घाट पर करीब 20 से 25 नावों से रेत बिछाई जाएगी। जेसीबी मशीनों का उपयोग करके घाटों को समतल किया जा रहा है, ताकि व्रतियों को अर्घ्य देते समय दलदल में पैर न धंसें। नगर निगम की टीमें बांस की चादरें भी बिछा रही हैं ताकि कीचड़ में स्थिरता आए और अस्थायी रास्ते मजबूत बन सकें।
दानापुर: 32 घाटों पर जलस्तर की कमी, तैयारियों में बाधा
दानापुर नगर परिषद क्षेत्र में 32 पारंपरिक छठ घाट हैं, जहाँ लाखों श्रद्धालु सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस वर्ष गंगा के जलस्तर में कमी आने से घाटों पर कीचड़ और गंदगी की मोटी परत जम गई है। परिषद ने सफाई, रोशनी, शौचालय, चेंजिंग रूम, बैरिकेडिंग और पेयजल जैसी सुविधाओं पर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने का लक्ष्य रखा है। परिषद के ईओ पंकज कुमार के अनुसार, जलस्तर में गिरावट को देखते हुए “वेट एंड वॉच” की स्थिति बनी हुई है। जैसे-जैसे गंगा का पानी पीछे हट रहा है, घाटों की वास्तविक स्थिति सामने आ रही है और काम का दायरा भी बढ़ रहा है।
समय कम, काम ज्यादा: छठ से पहले पूरी करनी होगी व्यवस्था
केवल 13 दिन शेष हैं, जब 25 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ छठ महापर्व का शुभारंभ होगा। गंगा घाटों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि सफाई और समतलीकरण का काम समय पर पूरा करने के लिए प्रशासन को चौबीसों घंटे काम करना होगा। एसडीओ सत्यम सहाय ने घाटों पर चाली बिछाने, चेंजिंग रूम, वाच टावर, लाइटिंग और अतिक्रमण हटाने जैसे कार्यों को छठ से पहले हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
छठ केवल एक पर्व नहीं, बल्कि जन आस्था का एक ऐसा महासागर है जो हर घाट पर उमड़ता है। परंतु, इस आस्था के सागर को सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल प्रदान करने की जिम्मेदारी प्रशासन और नगर निकायों पर है। इस बार गंगा का घटता जलस्तर प्रशासन के लिए एक नई और गंभीर चुनौती बनकर उभरा है – जहाँ समय बेहद कम है, ज़मीन दलदल में फँसी है, और लाखों श्रद्धालुओं की आँखें इन तैयारियों पर टिकी हैं।
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