सोशल मीडिया का दोहरा चरित्र: वरदान या अभिशाप? पूर्व सीजेआई गवई ने उठाए सवाल
नई दिल्ली: देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बी.आर. गवई ने सोशल मीडिया के अनियंत्रित उपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि यह शक्तिशाली तकनीक, जहाँ एक ओर ज्ञान और सूचना का भंडार है, वहीं दूसरी ओर इसके दुरुपयोग से समाज के तीनों स्तंभ – कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका – समान रूप से प्रभावित हो रहे हैं। “यह तकनीक एक वरदान है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल भी हो रहा है,” उन्होंने कहा, “और इस दुरुपयोग का खामियाजा हम सभी को भुगतना पड़ रहा है।”
पूर्व सीजेआई के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार आलोचना और ट्रोलिंग का दौर जारी है, जिससे तीनों ही सरकारी संस्थाएं निशाने पर हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जजों को अपनी निर्णय प्रक्रिया में सार्वजनिक प्रतिक्रिया या ऑनलाइन ट्रोलिंग से अप्रभावित रहना चाहिए। “एक जज को तथ्यों, दस्तावेजों और सबूतों के आधार पर ही निर्णय लेना चाहिए, न कि इस आधार पर कि लोग उनके फैसले को पसंद करेंगे या नहीं,” उन्होंने स्पष्ट किया।
हाल ही में भगवान विष्णु पर अपने एक बयान को लेकर हुई आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए, पूर्व सीजेआई गवई ने कहा कि वह सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं हैं। उनका मानना है कि जजों को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाने वाली ट्रोलिंग पूरी तरह से गलत है।
जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े मामले पर पूछे जाने पर, उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच एक समिति द्वारा की जा रही है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक जज कर रहे हैं। इसलिए, इस समय इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
बी.आर. गवई, जो भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश बने, का कानूनी सफर प्रभावशाली रहा है। 1985 में वकालत शुरू करने वाले जस्टिस गवई ने वकील, बॉम्बे हाई कोर्ट के जज, सुप्रीम कोर्ट के जज और अंततः सीजेआई के रूप में न्यायपालिका के प्रति अपनी अटूट निष्ठा का प्रदर्शन किया। 14 मई को सीजेआई के रूप में शपथ लेकर उन्होंने न केवल न्यायिक कुशलता का प्रदर्शन किया, बल्कि इतिहास भी रचा। वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले बौद्ध और जस्टिस के.जी. बालकृष्णन के बाद अनुसूचित जाति समुदाय से दूसरे व्यक्ति थे।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


