कंगना रनौत को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका! मानहानि मामले में याचिका खारिज

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कंगना रनौत को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका! मानहानि मामले में याचिका खारिज
कंगना रनौत को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, मानहानि मामले में नहीं मिली राहत, याचिका पर सुनवाई से इनकार


किसान आंदोलन की ‘दादी’ पर टिप्पणी: कंगना रनौत को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, मानहानि केस में अब नहीं मिलेगी राहत!

फिल्म अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत को किसान आंदोलन से जुड़े एक मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को उनकी उस याचिका पर सुनवाई से साफ इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज शिकायत को रद्द करने की मांग की थी। इसके बाद कंगना ने अपनी याचिका वापस ले ली। यह मामला 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान एक महिला किसान पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है।

कंगना पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला किसान महिंदर कौर के बारे में अपमानजनक टिप्पणी की थी। किसान आंदोलन के दौरान, कंगना ने अपने एक रीट्वीट में महिंदर कौर की तस्वीर साझा करते हुए आपत्तिजनक रूप से लिखा था कि "यह वही बिलकिस बानो दादी है जो शाहीन बाग प्रदर्शन का हिस्सा थी।" इस गलत पहचान और अपमानजनक टिप्पणी के बाद, महिंदर कौर ने कंगना के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। इस शिकायत को रद्द करवाने के लिए कंगना ने पहले हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहाँ उन्हें कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

शुक्रवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने याचिकाकर्ता (कंगना) से तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “हम आपके ट्वीट पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, क्योंकि इससे ट्रायल पर असर पड़ेगा। यह सिर्फ एक साधारण री-ट्वीट नहीं था, इसमें आपकी व्यक्तिगत टिप्पणी भी शामिल थी।” सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी के बाद, कंगना के वकील ने अपनी याचिका वापस लेना ही उचित समझा।

इससे पहले, 1 अगस्त को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी कंगना रनौत की याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि याचिकाकर्ता एक जानी-मानी हस्ती हैं और उन पर गंभीर आरोप हैं कि उनके रीट्वीट में लगाए गए झूठे और मानहानिकारक आरोपों से प्रतिवादी (महिंदर कौर) की प्रतिष्ठा को गहरा नुकसान पहुँचा है। अदालत ने कहा था कि इससे न केवल दूसरों की नजरों में महिंदर कौर की छवि धूमिल हुई, बल्कि उन्हें आत्म-सम्मान को भी ठेस पहुँची। इसलिए, प्रतिवादी द्वारा अपने अधिकारों की रक्षा के लिए शिकायत दर्ज करना किसी भी सूरत में दुर्भावनापूर्ण नहीं माना जा सकता।


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