मणिपुर पर खड़गे का प्रहार, बीएलओ की जान पर भी उठाया सवाल: विपक्ष का ‘वोट चोरी’ पर तीखा वार
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर मणिपुर के मुद्दे पर खामोश रहने का आरोप लगाया है, जब तक कि विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लेकर नहीं आया। यह आरोप संसद में एक गरमागरम बहस के बीच आया, जहां विपक्ष ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए।
खड़गे ने चुनावी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बूथ स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) की दयनीय स्थिति पर भी गहरी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) के साथ एसआईआर (सिस्टमेटिक वोटर रजिस्ट्रेशन) प्रक्रिया के अत्यधिक कार्यभार के कारण बीएलओ लगातार अपनी जान गंवा रहे हैं। यह खुलासा चुनावी तंत्र के उन अनजाने नायकों की सुरक्षा पर सवाल उठाता है, जो निष्पक्ष चुनावों को सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास करते हैं।
इसके साथ ही, खड़गे ने जोर देकर कहा कि विपक्ष जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों को संसद में प्रमुखता देना चाहता है। उन्होंने ‘वोट चोरी’ की आशंका को एक गंभीर चिंता बताते हुए कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरता रहेगा और सवाल उठाता रहेगा। उनका मानना है कि यह मुद्दा सीधे तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अखंडता से जुड़ा है, और इस पर पारदर्शी चर्चा आवश्यक है।
यह बयान विपक्ष की रणनीति को स्पष्ट करता है, जिसमें वे मणिपुर जैसे संवेदनशील मुद्दों और चुनावी प्रक्रियाओं की खामियों को उजागर करके जनता के बीच सरकार की छवि को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। ‘वोट चोरी’ जैसे आरोप, यदि सिद्ध होते हैं, तो मतदाताओं के विश्वास को गंभीर रूप से ठेस पहुंचा सकते हैं, और विपक्ष इसी डर को भुनाने की कोशिश कर रहा है।
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