खलारी में ‘सफेद कहर’: कोयला धूल से अब फ्लाइ ऐश की मार, लोगों का जीना दूभर
खलारी: जो कोयलांचल पहले से ही काली धूल की चपेट में था, अब एक नई मुसीबत ने दस्तक दी है – सफेद फ्लाइ ऐश। एनटीपीसी टंडवा से निकले दर्जनों डंपर और ट्रक, जिनका गंतव्य सड़कों से होकर गुजरता है, फ्लाइ ऐश की मोटी परत बिछा रहे हैं, जिससे खलारी की जनता का जीवन दुष्कर हो गया है।
नियमानुसार, पर्यावरण की रक्षा करते हुए फ्लाइ ऐश का परिवहन किया जाना चाहिए, और राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने इसके लिए स्पष्ट मानक तय किए हैं। लेकिन, ऐसा प्रतीत होता है कि इन सभी नियमों और मानकों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से फ्लाइ ऐश का सड़क मार्ग से परिवहन किया जा रहा है।
सड़कों पर उड़ती राख, दुकानों में जमता ‘सफेद भूत’
परिवहन के दौरान, ट्रक और हाइवा अनियंत्रित होकर सड़कों पर फ्लाइ ऐश बिखेरते जा रहे हैं। ओवरलोड वाहनों के पहियों से उड़ती यह राख हवा में मिलकर पूरे वातावरण को दूषित कर रही है। केडी बाजार का हाल तो और भी बुरा है। दुकानदार सुबह अपनी दुकानों की सफाई करते-करते थक जाते हैं, क्योंकि बंद दुकानों के अंदर तक यह सफेद धूल जम जाती है। दिन भर सड़कों पर उड़ती यह राख राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बनी रहती है।
स्वास्थ्य के लिए ‘धीमी मौत’ का सामान
यह कोई साधारण धूल नहीं, बल्कि फ्लाइ ऐश है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। दुनिया भर में इसे एक बड़े पर्यावरणीय खतरे के रूप में जाना जाता है। इसमें सिलिकॉन डाइऑक्साइड, एल्यूमीनियम ऑक्साइड, फेरिक ऑक्साइड और कैल्शियम ऑक्साइड जैसे हानिकारक तत्व भारी मात्रा में होते हैं। फ्लाइ ऐश के कण जहरीले वायु प्रदूषक हैं, जो हृदय रोग, कैंसर, श्वसन संबंधी बीमारियों और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों को बढ़ावा दे सकते हैं। यदि इसकी ढुलाई बंद वाहनों में नहीं की गई, तो आने वाले समय में इसके गंभीर स्वास्थ्य परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
स्थानीय लोगों में रोष, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप
फ्लाइ ऐश की इस बेलगाम ढुलाई से स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। खलारी के व्यवसायी संघ और खलारी डेवलपमेंट ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर केडी मार्ग से फ्लाइ ऐश की ढुलाई पर पूर्ण रोक लगाने की मांग की है। इसके बावजूद, प्रशासन द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से लोगों में भारी नाराजगी है।
एनजीटी के मानकों का खुला उल्लंघन, ‘धीमी मौत’ बांट रहे ये वाहन
यह स्पष्ट है कि फ्लाइ ऐश के परिवहन के लिए एनजीटी द्वारा तय किए गए मानकों का बिल्कुल भी पालन नहीं किया जा रहा है। राख ढोने वाले ये ट्रक और हाइवा, अनजाने में ही सही, पर खलारी के लोगों के लिए ‘धीमी मौत’ बांट रहे हैं।
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