रुपया धड़ाम, प्रियंका का वार: ‘BJP, अब जवाब दो!’

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रुपया धड़ाम, प्रियंका का वार: 'BJP, अब जवाब दो!'
डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, प्रियंका गांधी ने पूछा- ...अब BJP का क्या कहना है?

रुपये का ऐतिहासिक पतन: डॉलर के सामने घुटने टेकता भारतीय रुपया, 90.43 का नया निम्नतम स्तर

3 दिसंबर को भारतीय रुपया एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर आ खड़ा हुआ, जहाँ उसने डॉलर के सामने अब तक का अपना सबसे निचला स्तर दर्ज किया। शुरुआती कारोबार में, 28 पैसे की भारी गिरावट के साथ, रुपया 90.43 प्रति अमेरिकी डॉलर के रिकॉर्ड-तोड़ निचले स्तर पर पहुंच गया। यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यह आयात की लागत बढ़ाने के साथ-साथ विदेशी निवेश को भी हतोत्साहित कर सकती है।

विदेशी फंडों की निरंतर निकासी का असर:

रुपये की इस गिरावट के पीछे एक प्रमुख कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय बाजारों से लगातार फंड्स की निकासी है। 2025 की शुरुआत से अब तक, रुपया डॉलर के मुकाबले 5.26% कमजोर हो चुका है। 1 जनवरी को जहां रुपया 85.70 के स्तर पर मजबूती से खड़ा था, वहीं आज यह 90.43 के स्तर पर लुढ़क गया है। यह तीव्र गिरावट उन संकेतों को उजागर करती है जो वैश्विक अनिश्चितताओं और भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति निवेशकों की बदलती धारणा को दर्शाते हैं।

रुपये की गिरती रफ्तार के पीछे दो प्रमुख कारण:

विदेशी मुद्रा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये के इस अप्रत्याशित पतन के पीछे दो मुख्य कारक सक्रिय हैं:

  • आयातकों की डॉलर की बढ़ती भूख: भारतीय अर्थव्यवस्था में, विशेषकर ऊर्जा और अन्य आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिए डॉलर की मांग निरंतर बनी रहती है। वर्तमान में, इस मांग में अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक का सीमित हस्तक्षेप: ऐसा प्रतीत हो रहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रुपये को स्थिर करने के लिए सीमित हस्तक्षेप कर रहा है। यह नीतिगत निर्णय, चाहे वह जानबूझकर हो या बाजार की ताकतों के आगे समर्पण, रुपये को अपनी गिरावट की गति को जारी रखने की अनुमति दे रहा है।

रुपये का यह ऐतिहासिक निचला स्तर न केवल भारतीय उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए, बल्कि देश की समग्र आर्थिक स्थिरता के लिए भी एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश करता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और RBI इस स्थिति से कैसे निपटते हैं और क्या वे रुपये को फिर से पटरी पर ला पाते हैं।


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