मदरसों के खिलाफ जांच पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की रोक: मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के 558 सहायता प्राप्त मदरसों के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के निर्देश पर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा की जा रही जांच पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने मामले में NHRC और शिकायतकर्ता मोहम्मद तल्हा अंसारी को नोटिस जारी किया है, और अगली सुनवाई 17 नवंबर, 2025 को तय की है।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब मोहम्मद तल्हा अंसारी ने इन मदरसों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर, NHRC ने EOW के महानिदेशक को जांच का निर्देश दिया था। हालांकि, आयोग के इस निर्देश और जांच की वैधता को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई। याचिका में NHRC द्वारा पारित विभिन्न आदेशों, जिनमें जांच के आदेश और 23 अप्रैल 2025 को जारी सरकारी आदेश शामिल है, को रद्द करने की मांग की गई है। इस सरकारी आदेश में EOW को सभी 558 मदरसों की जांच के लिए अधिकृत किया गया था।
याचिका में यह तर्क दिया गया कि मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत NHRC के कार्यों का स्पष्ट रूप से उल्लेख है। साथ ही, धारा 36(2) के अनुसार, आयोग मानवाधिकार उल्लंघन की घटना के एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर मामले की जांच नहीं कर सकता। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि धारा 12-ए के तहत, आयोग केवल स्वतः संज्ञान लेकर, पीड़ित की याचिका पर, पीड़ित की ओर से किसी अन्य व्यक्ति की याचिका पर, या न्यायालय के निर्देश पर ही जांच कर सकता है। याचिकाकर्ता का दावा है कि वर्तमान मामले में इनमें से कोई भी शर्त पूरी नहीं होती है।
इस दलील को सुनने के बाद, खंडपीठ ने अंतरिम रोक लगाते हुए सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह निर्णय मदरसों के संबंध में चल रही जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, और आगे की सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
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