2 करोड़ ड्रोन का जाल, जयशंकर रूस में, यूक्रेन की भारत से ऐसी मांग, पुतिन रह जाएंगे हतप्रभ!

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2 करोड़ ड्रोन का जाल, जयशंकर रूस में, यूक्रेन की भारत से ऐसी मांग, पुतिन रह जाएंगे हतप्रभ!
2 करोड़ ड्रोन...जयशंकर ने रूस में रखा कदम, उधर यूक्रेन करने वाला है भारत से ऐसी डिमांड, पुतिन पकड़ लेंगे अपना माथा

भारत-रूस शिखर सम्मेलन की तैयारी के बीच यूक्रेन का ‘ड्रोन शक्ति’ दांव: क्या बदलेगी जंग की तस्वीर?

इस दिसंबर, भारत एक बड़े कूटनीतिक आयोजन की मेज़बानी के लिए तैयार है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा, जो वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन का हिस्सा होगी, वैश्विक पटल पर खासी अहमियत रखती है। यूक्रेन युद्ध को लेकर पश्चिमी देशों की नाराजगी के बावजूद, पुतिन का यह कदम नई दिल्ली के साथ मॉस्को के मजबूत संबंधों को रेखांकित करता है। इसी सम्मेलन की ज़मीनी तैयारी के लिए भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर हाल ही में मॉस्को पहुंचे, जहाँ उनकी रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव से महत्वपूर्ण मुलाकात हुई।

यूक्रेन की ‘ड्रोन आर्मी’ की घोषणा: युद्ध का नया मोर्चा?

हालांकि, इन कूटनीतिक मुलाकातों के बीच, यूक्रेन ने एक चौंकाने वाली घोषणा कर दुनिया का ध्यान खींचा है। यूक्रेन ने युद्ध के मैदान में अपनी शक्ति बढ़ाने के उद्देश्य से एक ‘ड्रोन आर्मी’ बनाने का ऐलान किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कदम यूक्रेन को अपने दुश्मन से मुकाबला करने में और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सीबिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस बात की जानकारी देते हुए, दुनिया भर के समर्थकों से ड्रोन उत्पादन और उसके विस्तार में मदद की अपील की है।

सस्ते ड्रोन ही बनाएंगे शांति: यूक्रेन की अपील

यूक्रेन के विदेश मंत्री ने अपने पोस्ट में एक महत्वपूर्ण बात कही है: “आधुनिक हथियारों की दौड़ परमाणु हथियारों के बारे में नहीं, यह लाखों सस्ते ड्रोन के बारे में है। जो लोग उत्पादन को तेजी से बढ़ा सकते हैं, वे शांति सुनिश्चित करेंगे।” उन्होंने यूक्रेन के रक्षा उद्योग के लिए पर्याप्त वित्तीय सहायता की आवश्यकता पर जोर दिया, और कहा कि अगर पर्याप्त धन मिले तो वे अगले साल तक 2 करोड़ ड्रोन तैयार कर सकते हैं। हालांकि, इस अपील में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यूक्रेन ने किन देशों से विशेष रूप से मदद मांगी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत जैसे देश यूक्रेन की इस ‘ड्रोन बनाने की डील’ में शामिल होते हैं।

भारत-रूस संबंध: स्थिरता का स्तंभ

इस बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मॉस्को में भारत-रूस संबंधों की गहराई पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “भारत-रूस संबंध लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्थिरता का एक कारक रहे हैं और इनका विकास और विकास न केवल दोनों देशों के पारस्परिक हित में है, बल्कि विश्व के हित में भी है।” लावरोव के साथ अपनी बैठक में, जयशंकर ने द्विपक्षीय समझौतों, पहलों और परियोजनाओं पर चल रही चर्चाओं का उल्लेख किया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह मुलाकात 23वें वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा की तैयारी के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

जटिल वैश्विक परिदृश्य पर विचारों का आदान-प्रदान

जयशंकर ने स्वीकार किया कि दोनों देश एक जटिल वैश्विक स्थिति पर भी विचारों का आदान-प्रदान करेंगे, जिसमें यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व और अफगानिस्तान जैसे मुद्दे शामिल हैं। उन्होंने भारत के शांति स्थापना के प्रयासों के प्रति समर्थन को दोहराया और उम्मीद जताई कि सभी पक्ष इस लक्ष्य की ओर रचनात्मक रूप से आगे बढ़ेंगे। “संघर्ष का शीघ्र अंत और स्थायी शांति सुनिश्चित करना पूरे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के हित में है,” उन्होंने कहा।

यह देखना बाकी है कि यूक्रेन की ‘ड्रोन आर्मी’ की घोषणा, भारत-रूस शिखर सम्मेलन की पृष्ठभूमि में, वैश्विक भू-राजनीति को कैसे प्रभावित करती है, और क्या यह युद्ध की दिशा को बदलने में कोई भूमिका निभाती है।


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