जुलाई योद्धाओं का आक्रोश: सड़कों पर उतरे, न्याय की मांग
बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक उथल-पुथल की आग में जल रहा है। ‘जुलाई जोधा संसद’ (जुलाई योद्धा) के नेतृत्व में, देश भर में हज़ारों ‘जुलाई योद्धा’ अपनी जायज़ मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। उन्होंने रविवार को देश के सभी प्रमुख राजमार्गों को अवरुद्ध कर दिया, जिससे जनजीवन ठप हो गया। यह आक्रोश जुलाई 2024 के उन खूनी प्रदर्शनों से उपजा है, जिनमें कई जानें गईं और कई घायल हुए।
‘जुलाई योद्धाओं’ की तीन सूत्री मांगें सीधे तौर पर इन घटनाओं के पीड़ितों के न्याय से जुड़ी हैं। उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- शहीदों को राष्ट्रीय सम्मान: जुलाई 2024 के विरोध प्रदर्शनों में जान गंवाने वाले लोगों को राज्य की ओर से आधिकारिक मान्यता दी जाए।
- घायलों की पहचान: इस हिंसक संघर्ष में घायल होने वाले लोगों को ‘जुलाई योद्धा’ के रूप में सम्मानित किया जाए।
- परिवारों का पुनर्वास: शहीद हुए लोगों के परिवारों के पुनर्वास के लिए एक स्पष्ट और विस्तृत योजना (रोडमैप) तैयार की जाए।
- कानूनी सहायता: घायलों को आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
यह विरोध ऐसे समय में हो रहा है, जब अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस, राष्ट्रीय सहमति आयोग के सदस्यों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शुक्रवार को ‘जुलाई चार्टर’ पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) और चार वामपंथी दलों ने इस हस्ताक्षर समारोह का बहिष्कार किया, जो इस संवेदनशील मुद्दे पर व्याप्त राजनीतिक मतभेद को दर्शाता है।
‘जुलाई जोधा संसद’ समूह के मुख्य आयोजक, मसूद राणा, ने शुक्रवार शाम को ढाका में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजमार्ग अवरुद्ध करने की घोषणा की। यह कदम संसद परिसर के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों के जवाब में उठाया गया था, जहाँ ‘जुलाई चार्टर’ पर हस्ताक्षर के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।
बांग्लादेशी दैनिक ‘जुगांतोर’ ने मसूद के हवाले से कहा, “हम पर हमला किया गया है। हम पर हुए हमले का विरोध करने और अपनी तीन सूत्री मांगों को पूरा करने के लिए, रविवार को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक हर जिले और शहर के राजमार्गों पर नाकाबंदी की जाएगी।” उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके “शांतिपूर्ण धरने” पर अचानक हमला कर दिया, जबकि वे प्रशासनिक अधिकारियों के साथ संवाद कर रहे थे और शांति बनाए रखने का आश्वासन दिया था।
शुक्रवार की दोपहर, ‘जुलाई चार्टर’ हस्ताक्षर समारोह से कुछ घंटे पहले, संसद परिसर में कानून प्रवर्तन अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिनमें कई लोग घायल हो गए। ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल पुलिस चौकी के प्रभारी इंस्पेक्टर फारुक ने पुष्टि की कि जुलाई विरोध प्रदर्शनों में शामिल 36 लोगों को गंभीर चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
रिपोर्टों के अनुसार, जब प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर जोर देने के लिए रैली निकालने की कोशिश कर रहे थे, तब सेना और पुलिस ने उन्हें संसद द्वार पर रोक दिया, जिससे हिंसा भड़क उठी। पुलिस ने लाठीचार्ज किया और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए साउंड ग्रेनेड दागे। इसके जवाब में, प्रदर्शनकारियों ने तोड़फोड़ की, जिसमें एक कार और एक बस सहित पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हुए। उन्होंने ‘जुलाई चार्टर’ हस्ताक्षर समारोह के लिए स्थापित स्वागत कक्ष, नियंत्रण कक्ष और फर्नीचर में आग लगा दी।
प्रदर्शनकारियों ने अंतरिम सरकार को चेतावनी दी है, “अगर हमें फिर से अपना खून बहाना पड़ा, तो दूसरा प्रशासन भी नहीं बचेगा।” उन्होंने पिछले साल हुए विरोध प्रदर्शनों की याद दिलाई, जिन्होंने तत्कालीन अवामी लीग सरकार को गिरा दिया था और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने का मार्ग प्रशस्त किया था। यह स्पष्ट है कि ‘जुलाई योद्धा’ अपने हक़ के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
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