ईरान में महासंग्राम: 2500 मौतों के बाद ट्रंप का बड़ा ऐलान—‘मदद रास्ते में है’, क्या फिर भड़केगी जंग?

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ईरान में महासंग्राम: 2500 मौतों के बाद ट्रंप का बड़ा ऐलान—'मदद रास्ते में है', क्या फिर भड़केगी जंग की चिंगारी?
ट्रम्प ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर धमकी दी है.

पिछले 18 दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच सुलग रही तनाव की चिंगारी अब एक भीषण ज्वाला का रूप ले चुकी है। ईरान की सड़कों पर गूंजते सरकार विरोधी नारों और उन पर हुई बर्बर सैन्य कार्रवाई ने पूरे देश को हिंसा की आग में झोंक दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी चेतावनी और तेहरान के तीखे पलटवार ने इस पूरे क्षेत्र को एक अनिश्चित युद्ध जैसी स्थिति में ला खड़ा किया है।

तेहरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वे ईरान की संप्रभुता और अखंडता को चोट पहुंचा रहे हैं और राजनीतिक उथल-पुथल को हवा दे रहे हैं। दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों ने पुष्टि की है कि ईरानी प्रशासन प्रदर्शनकारियों को बेरहमी से कुचल रहा है, जिससे हालात और भी ज्यादा बेकाबू होने के आसार हैं।

मानवाधिकार संस्था HRANA और एसोसिएटेड प्रेस के आंकड़े रूह कंपा देने वाले हैं—अब तक 2500 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। ईरान के सरकारी टीवी ने भी इस भारी जनहानि को स्वीकार किया है, जबकि शहीद फाउंडेशन के अधिकारियों ने अशांति के दौरान मारे गए लोगों को ‘शहीद’ बताकर स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया है।

अवेयर मीडिया नेटवर्क

ट्रंप की दोटूक चेतावनी: ‘मदद रास्ते में है’

राष्ट्रपति ट्रंप लगातार ईरान पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ऐलान किया कि जब तक प्रदर्शनकारियों का कत्लेआम नहीं रुकता, ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द रहेंगी। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का उत्साह बढ़ाते हुए लिखा—”मदद रास्ते में है,” और उनसे सरकारी संस्थानों पर कब्जा करने की अपील भी की। हालांकि, ईरान ने इसे अपने आंतरिक मामलों में ‘खुला हस्तक्षेप’ करार दिया है।

पत्रकारों से चर्चा के दौरान ट्रंप ने साफ किया कि उनका प्रशासन हत्याओं के वास्तविक आंकड़ों की पुष्टि कर रहा है और उसके बाद ही निर्णायक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने ईरानी नेताओं से मानवता दिखाने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि अगर खून-खराबा नहीं थमा, तो परिणाम गंभीर होंगे।

इधर, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने संकेत दिए हैं कि ट्रंप की ‘मदद’ का मतलब सैन्य या साइबर कार्रवाई भी हो सकता है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी बंद कमरे में हुई बैठक में गैर-सैन्य विकल्पों और साइबर हमलों की संभावनाओं पर चर्चा की है, जिससे वाशिंगटन के अगले कदम को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है।

तेहरान का तीखा पलटवार और पर्दे के पीछे की कूटनीति

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने ट्रंप और इजरायली पीएम नेतन्याहू को ईरान का ‘असली हत्यारा’ बताया है। इस बीच, एक बड़ी कूटनीतिक हलचल भी देखने को मिली है। ‘एक्सियोस’ के मुताबिक, व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉक ने ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी से गोपनीय मुलाकात की है।

1979 की क्रांति में सत्ता गंवाने वाले शाह के बेटे रजा पहलवी खुद को शासन बदलने की स्थिति में एक अंतरिम नेता के रूप में पेश कर रहे हैं। 1979 के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिकी प्रशासन और ईरानी विपक्षी नेताओं के बीच इतनी उच्च स्तरीय बातचीत हुई है।

वैश्विक शक्तियों का बढ़ता दबाव

क्षेत्रीय शांति के लिए कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल-थानी ने अली लारीजानी से बात कर तनाव कम करने की वकालत की है। दूसरी तरफ, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने ईरान की घेराबंदी तेज कर दी है। ब्रिटिश विदेश मंत्री यवेट कूपर ने ऊर्जा और परिवहन क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंधों की घोषणा की है, तो यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन ने दमनकारी अधिकारियों को नए प्रतिबंधों की चेतावनी दी है।

सबसे भयावह आशंका एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जताई है। संगठन का कहना है कि ईरान विरोध को दबाने के लिए ‘मोहरबेह’ (ईश्वर के खिलाफ युद्ध) जैसे आरोपों के तहत जल्दबाजी में फांसी की सजा दे सकता है। 26 वर्षीय इरफान सुल्तानी का मामला इसका उदाहरण है, जिन्हें मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। इस मानवाधिकार संकट पर फ्रांस और जर्मनी ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए ईरानी राजदूतों को तलब किया है और बल प्रयोग तुरंत बंद करने की मांग की है।

 

 


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