नेपाल और गाजा: ‘जेन-जेड’ की मौत और जलता हुआ युद्ध

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
4 Min Read
नेपाल और गाजा: 'जेन-जेड' की मौत और जलता हुआ युद्ध
नेपाल में हिंसा में मारे गए ‘जेन-जेड’ मृतकों का....और ‘गाजा जल रहा है’

नेपाल: ‘जेन-जेड’ के वीरों को राजकीय सम्मान, काठमांडू की धरती पर नम हुईं आँखें

काठमांडू: नेपाल में सरकार के खिलाफ हुए जोरदार प्रदर्शनों की आग भले ही शांत हो गई हो, लेकिन उन प्रदर्शनों की आंच में झुलस गए ‘जेन-जेड’ पीढ़ी के वीर सपूतों की स्मृति आज भी देशवासियों के दिलों में अमिट है। मंगलवार को काठमांडू के पवित्र पशुपति आर्यघाट पर इन युवा शहीदों का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया, तो पूरा राष्ट्र गमगीन हो उठा। देश के अन्य जिलों में भी कुछ अन्य लोगों के शवों का अंतिम संस्कार किया गया, जो इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के गवाह बने।

‘जेन-जेड’ पीढ़ी, जो 1997 से 2012 के बीच जन्मी है, ने अपनी आवाज़ बुलंदी से उठाई और इस प्रक्रिया में अपनी जान गंवा दी। पशुपति मंदिर के एक अधिकारी के अनुसार, बागमती नदी के तट पर चार वीर आत्माओं को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस मार्मिक क्षण के साक्षी बने ऊर्जा एवं भौतिक अवसंरचना मंत्री कुलमन घीसिंग और गृह मंत्री ओम प्रकाश आर्यल, जिन्होंने शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़े होकर अपना दुख साझा किया।

त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल, महाराजगंज से अंतिम यात्रा का आरंभ हुआ, जिसने हजारों लोगों के हुजूम को अपनी ओर खींचा, जो अपने इन युवा नायकों को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए उमड़े थे। यह यात्रा पशुपति में समाप्त हुई, जहां हवा में एक गहरी खामोशी और सम्मान का भाव था।

अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने के बाद, छह शवों को अंतिम संस्कार के लिए काठमांडू से बाहर विभिन्न जिलों में भेजा गया। रविवार और सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद बाकी बचे शव उनके परिवारों को सौंप दिए गए थे, ताकि वे अपनी रीति-रिवाजों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार कर सकें।

नेपाल की प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने एक साहसिक कदम उठाते हुए, आठ और नौ सितंबर को ‘जेन-जेड’ विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारे गए लोगों को ‘शहीद’ घोषित करने की घोषणा की थी। यह घोषणा उन अनगिनत युवा चेहरों के प्रति सरकार के सम्मान और संवेदना को दर्शाती है, जिन्होंने एक बेहतर भविष्य के लिए अपना बलिदान दिया।

सरकार ने शहीदों के परिवारों को 15 लाख नेपाली रुपये के मुआवज़े की घोषणा की है, जो उनके नुकसान की भरपाई तो नहीं कर सकता, लेकिन उन्हें कुछ राहत अवश्य प्रदान करेगा। प्रदर्शनकारियों की मौत से उत्पन्न हुए गहरे शोक के चलते, बुधवार को पूरे देश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है और राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा, जो उन सभी को श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने इस संघर्ष में अपना जीवन न्योछावर कर दिया।

यह दुखद घटना नेपाल में आठ और नौ सितंबर को हुए हिंसक प्रदर्शनों का परिणाम थी, जिसमें तीन पुलिसकर्मियों और 10 कैदियों सहित कुल 72 लोगों की जान चली गई थी। इन घटनाओं ने तत्कालीन प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की सरकार को भी हिला कर रख दिया था।

कई मंत्रालयों ने ‘जेन-जेड’ प्रदर्शनों के दौरान हुए नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। जली हुई कारों, क्षतिग्रस्त उपकरणों और संपत्तियों के बारे में आंकड़े एकत्र किए जा रहे हैं, जो इस हिंसक संघर्ष के विनाशकारी प्रभाव को दर्शाते हैं। यह घटना न केवल व्यक्तिगत जीवन में एक खालीपन छोड़ गई है, बल्कि देश के विकास और भविष्य पर भी गहरा प्रभाव डालेगी।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

TAGGED:
Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है।Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *