नेपाल का सियासी गतिरोध समाप्त: सुशीला कार्की बनीं अंतरिम PM, आंदोलनकारियों की सहमति पर आज लेंगी शपथ

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नेपाल का सियासी गतिरोध समाप्त: सुशीला कार्की बनीं अंतरिम PM, आंदोलनकारियों की सहमति पर आज लेंगी शपथ
सुशीला कार्की होंगी नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री, आंदोलनकारियों में बनी सहमति, आज ही लेंगी पद की शपथ

एक ऐतिहासिक क्षण! नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकीं सुशीला कार्की अब देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनेंगी। भीषण हिंसा के बीच, उनके समक्ष देश में शांति और कानून-व्यवस्था की बहाली सबसे बड़ी चुनौती है।

नेपाल में कई दिनों से जारी राजनीतिक गतिरोध और भारी हिंसा के दौर का अंत होता दिख रहा है। राष्ट्रपति कार्यालय ने आज ऐलान किया कि देश की पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की अब अंतरिम सरकार की बागडोर संभालेंगी। ‘जेन जेड’ प्रदर्शनकारी समूह के प्रतिनिधियों और सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कार्की के नाम पर एक दुर्लभ आम सहमति बनी है। रात नौ बजे शपथ ग्रहण समारोह निर्धारित है, और इसी के साथ 73 वर्षीय सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बन जाएंगी।

राष्ट्रपति की प्रेस सलाहकार किरण पोखरेल ने इस महत्वपूर्ण निर्णय की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल, नेपाल के शीर्ष सैन्य अधिकारियों और ‘जेन जेड’ के प्रतिनिधियों के बीच हुई निर्णायक बैठक के बाद कार्की को अंतरिम सरकार का नेतृत्व सौंपा गया है। रात नौ बजे होने वाले शपथ ग्रहण समारोह के लिए राष्ट्रपति भवन में तैयारियां ज़ोरों पर हैं।

73 वर्षीय कार्की, जिन्हें नेपाल की पहली महिला प्रधान न्यायाधीश के रूप में अपने निष्पक्ष और प्रभावशाली कार्यकाल के लिए व्यापक सम्मान मिला है, अब देश को नेतृत्व देंगी। रविवार से जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के चलते उनके समक्ष देश में तत्काल कानून-व्यवस्था बहाल करने की भीषण चुनौती खड़ी है।

राष्ट्रपति कार्यालय की इस घोषणा से पिछले छह दिनों से जारी नेपाल की गहन राजनीतिक अस्थिरता पर विराम लगने की उम्मीद है। यह अस्थिरता युवाओं के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के कारण उत्पन्न हुई थी, जिसके चलते मंगलवार को के पी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान 51 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हिंसक भीड़ ने ओली सरकार के मंत्रियों, पूर्व प्रधानमंत्रियों और अन्य राजनेताओं पर जानलेवा हमले किए, उनके घरों में तोड़फोड़ और आगजनी की। संसद भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय और पीएम आवास सहित कई महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों को भी भीड़ ने आग के हवाले कर दिया था, जिससे स्थिति अत्यंत भयावह हो गई थी।


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