पाकिस्तान के इतिहास में एक नया अध्याय? सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर असिम मुनीर का ‘ताउम्र’ असर!

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| पाकिस्तान के इतिहास में एक नया अध्याय? सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर असिम मुनीर का 'ताउम्र' असर! |
Asim Munir ने पाकिस्तान में एक और सुप्रीम कोर्ट बना दी! इमरान को अब ताउम्र जेल में ही रहना होगा?

पाकिस्तान के संविधान में एक नया अध्याय: फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के बढ़ते प्रभुत्व की गाथा

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने 27वें संविधान संशोधन विधेयक पर मुहर लगा दी है, जिससे यह देश के कानूनी ढांचे का अहम हिस्सा बन गया है। यह विधेयक, जो चर्चाओं के केंद्र में रहा है, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की शक्तियों में अप्रत्याशित वृद्धि करता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब एक नए न्यायालय की स्थापना से सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों को सीमित किया गया है।

न्यायपालिका पर सेना का शिकंजा: एफसीसी का उदय

पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने अब न्यायपालिका पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से 27वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित करवाकर, मुनीर ने सुप्रीम कोर्ट के समानांतर एक संघीय संवैधानिक कोर्ट (एफसीसी) का गठन किया है। विधेयक के पारित होने के मात्र 24 घंटे के भीतर ही, मुनीर ने अमीनुदुद्दीन खान को एफसीसी के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पुनः शपथ दिलवाई। पाकिस्तान के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी आर्मी चीफ ने मुख्य न्यायाधीश के शपथ ग्रहण समारोह में स्वयं शिरकत की हो।

न्यायपालिका सेना के पैरों तले?

एफसीसी के गठन और सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियों में कटौती को लेकर विरोध के स्वर उठने लगे हैं। पूर्व सीजे उमर अत्ता बदिपाल सहित सुप्रीम कोर्ट के सात अन्य पूर्व न्यायाधीशों ने इस्लामाबाद में एक बैठक की, जिसमें सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के वकील भी शामिल हुए। बदिपाल का कहना है कि पाकिस्तान की न्यायपालिका को सेना के चरणों में कुचला जा रहा है। यह चिंता तब और बढ़ जाती है जब यह देखा जाता है कि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों ने इस्तीफा दे दिया।

इमरान खान के मामले: मुनीर का नियंत्रण

एफसीसी के पास अब सभी संवैधानिक मामलों की सुनवाई का अधिकार होगा, जिससे सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका सीमित हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट अब किसी भी मामले में स्वतः संज्ञान नहीं ले सकेगा; यह अधिकार भी एफसीसी के पास होगा। वर्तमान में, सुप्रीम कोर्ट के पास केवल निचली और उच्च अदालतों से आने वाले दीवानी और फौजदारी मामलों की सुनवाई का ही अधिकार रह गया है।

इस बदलाव का सीधा लाभ मुनीर को मिलेगा। सेना से जुड़े नागरिक मामलों की जांच भी अब एफसीसी में ही होगी। इसका मतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से जुड़े आर्मी कैंट हमलों के सभी मामले एफसीसी में चलेंगे। इस प्रकार, मुनीर अपने राजनीतिक विरोधी इमरान खान से जुड़े किसी भी मामले के फैसले को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकेंगे। 27वें संविधान संशोधन के तहत, अब फील्ड मार्शल मुनीर पर किसी भी अदालत में कोई केस नहीं चल पाएगा।

सर्वोच्च न्यायालय में परिवर्तन: एक नई व्यवस्था

एक नया संघीय संवैधानिक न्यायालय (एफसीसी) स्थापित किया जा रहा है, जिसके अपने मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश होंगे, जिनकी नियुक्ति सरकार द्वारा की जाएगी। यह न्यायालय संविधान की व्याख्या करेगा और विभिन्न सरकारों, चाहे वे संघीय और प्रांतीय हों या दो राज्य सरकारों के बीच के विवादों से संबंधित मामलों की सुनवाई करेगा। इस प्रकार, सर्वोच्च न्यायालय अब केवल दीवानी और फौजदारी मामलों के लिए अंतिम अपील न्यायालय रह गया है। एफसीसी के निर्णय सभी अन्य अदालतों पर बाध्यकारी होंगे।


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