ट्रंप की ‘एक्स्कवेटर डिप्लोमेसी’: क्या वाकई ईरान अपना यूरेनियम अमेरिका को सौंपने वाला है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी परमाणु गतिरोध के बीच एक विस्फोटक और चौंकाने वाला दावा किया है, जिसे अब दुनिया ‘एक्स्कवेटर डिप्लोमेसी’ के रूप में देख रही है। एरिजोना के एक सार्वजनिक मंच से ट्रंप ने गर्जना की कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को सौंपने और उसे अमेरिका ले जाने पर राजी हो गया है। ट्रंप की योजना के अनुसार, वे विशालकाय खुदाई मशीनों के साथ ईरान जाएंगे और इस परमाणु सामग्री को सुरक्षित ढंग से वापस लाएंगे। हालांकि, यह दावा जितना फिल्मी लगता है, उतना ही विवादास्पद भी है, क्योंकि ईरानी अधिकारियों ने ऐसी किसी भी डील को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रंप का यह ‘बड़ा दांव’ एक ओर समाधान की उम्मीद जगाता है, तो दूसरी ओर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की उनकी धमकी ने वैश्विक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। अब सबकी नजरें पाकिस्तान में होने वाली अगले दौर की वार्ता पर हैं, जहाँ तय होगा कि यह ट्रंप की हकीकत है या महज एक कूटनीतिक चाल।
इसे भी पढ़ें: IPL 2026: कोलकाता नाइट राइडर्स की फिर हार, प्लेऑफ की राह हुई मुश्किल, गुजरात के लिए शुभमन गिल ने खेली कप्तानी पारी
ईरान से यूरेनियम लाएंगे ‘खोदकर’? ट्रंप का अनोखा ऐलान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत में एक नई ऊर्जा भरते हुए दावा किया है कि ईरान अब “हर बात पर सहमत” है। विशेष रूप से संवर्धित यूरेनियम को लेकर ट्रंप का बयान बेहद चौंकाने वाला था। फीनिक्स में ‘टर्निंग पॉइंट USA’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा: “हम ईरान के साथ तालमेल बिठाएंगे और वहां से यूरेनियम लाने के लिए बड़ी खुदाई मशीनों (Excavators) का सहारा लेंगे। हम उसे वापस अमेरिका ले आएंगे।” इसके उलट, ईरानी प्रशासन ने ट्रंप के दावों को कोरी कल्पना बताते हुए कहा है कि यूरेनियम हस्तांतरण को लेकर कोई सहमति नहीं बनी है।
इसे भी पढ़ें: Indian Sports में बड़ा विवाद: कोच पर नशे में Harassment का आरोप, Paralympic Champion Sumit Antil ने खोले राज
इस्लामाबाद की विफलता और बढ़ता कूटनीतिक गतिरोध
पिछले सप्ताह इस्लामाबाद में हुई वार्ता बेनतीजा रही, जिसका मुख्य केंद्र परमाणु कार्यक्रम पर उपजा मतभेद था।
अमेरिकी पक्ष: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि ईरान ने अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया, जिसके कारण बातचीत पटरी से उतर गई।
ईरानी पक्ष: ईरान ने अमेरिका की मांगों को “बेबुनियाद” करार दिया और दोहराया कि उनका परमाणु कार्यक्रम केवल बिजली और नागरिक उपयोग जैसे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
होर्मुज की नाकेबंदी: वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी
वार्ता विफल होते ही ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी की चेतावनी दे दी है। ईरान ने इसे मौजूदा समझौतों का खुला उल्लंघन माना है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका अपने वादों से मुकरता है, तो ईरान चुप नहीं बैठेगा और “कठोर जवाबी कार्रवाई” करेगा।
आगामी सोमवार की वार्ता वैश्विक तेल बाजार और मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। यदि कूटनीति विफल रही, तो होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में भूचाल ला सकता है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


