भारतीय रेल का ऐतिहासिक कदम: अब विदेश में दौड़ेंगे ‘पुराने’ डीजल लोकोमोटिव!
नई दिल्ली: रेल मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाली प्रतिष्ठित कंपनी राइट्स लिमिटेड, इतिहास रचने के कगार पर है। पहली बार, भारत अपने चालू हालत के डीजल लोकोमोटिव का निर्यात करने जा रहा है, जिसकी पहली खेप दक्षिण अफ्रीका के लिए रवाना होगी। यह कदम भारतीय रेल के बढ़ते प्रभुत्व और वैश्विक स्तर पर अपनी विशेषज्ञता साबित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
विद्युतीकरण का नया अध्याय और निर्यात का उजला भविष्य:
राइट्स के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक, राहुल मिथल ने इस ऐतिहासिक निर्णय के पीछे की वजह बताते हुए कहा, “भारतीय रेल अब लगभग पूरी तरह विद्युतीकृत हो चुकी है। इसी क्रम में, हमने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि 15 साल से अधिक आयु वाले चालू हालत के डीजल लोकोमोटिव को विदेश निर्यात किया जाएगा।” यह कदम न केवल पुराने उपकरणों के पुन: उपयोग को बढ़ावा देगा, बल्कि देश के लिए नए राजस्व स्रोत भी खोलेगा।
दक्षिण अफ्रीका से पहला बड़ा ऑर्डर:
कंपनी ने दक्षिण अफ्रीका से 18 चालू हालत के डीजल लोकोमोटिव निर्यात करने का एक महत्वपूर्ण ऑर्डर हासिल किया है। इन लोकोमोटिव में दक्षिण अफ्रीकी रेलवे की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप आवश्यक तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं। यह उल्लेखनीय है कि अब तक राइट्स केवल नए लोकोमोटिव का निर्यात करती रही है, लेकिन यह पहली बार है जब पुराने, लेकिन पूरी तरह से कार्यशील लोकोमोटिव को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भेजा जा रहा है।
गेज की भिन्नता को दूर करने की तकनीक:
दक्षिण अफ्रीका में केप गेज (1,067 मिमी) और भारत में ब्रॉड गेज (1,676 मिमी) के बीच गेज की भिन्नता एक तकनीकी चुनौती हो सकती है, लेकिन राइट्स ने इस पर भी अपनी विशेषज्ञता का परिचय दिया है। आवश्यक तकनीकी संशोधनों के बाद, ये लोकोमोटिव दोनों देशों की रेलवे लाइनों पर पूरी तरह उपयुक्त साबित होंगे।
आशा और विश्वास: पड़ोसी देशों से भी उम्मीद:
राहुल मिथल ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा, “वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही तक पहली संशोधित डीजल लोकोमोटिव की आपूर्ति कर दी जाएगी। हमें उम्मीद है कि हमारी गुणवत्ता और तकनीकी क्षमता को देखकर दक्षिण अफ्रीका के पड़ोसी देशों से भी ऐसे ही निर्यात के ऑर्डर मिलेंगे।” यह कथन राइट्स के भविष्य के लक्ष्यों और वैश्विक रेलवे बाजार में अपनी पैठ बनाने की दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। यह निर्यात न केवल भारत के लिए एक आर्थिक उपलब्धि है, बल्कि यह दुनिया को भारतीय इंजीनियरिंग और तकनीकी कौशल का एक और प्रमाण भी प्रस्तुत करेगा।
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