BMC चुनाव से पहले महा-खेल: उद्धव पर हमलावर सोमैया को मिला शिवसेना का बड़ा साथ, समझें इनसाइड स्टोरी!

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
4 Min Read
BMC चुनाव से पहले महा-खेल: उद्धव पर हमलावर सोमैया को मिला शिवसेना का बड़ा साथ, समझें इनसाइड स्टोरी!
BMC Election: उद्धव ठाकरे पर ताबड़तोड़ हमले करने वाले किरीट सोमैया की शिवसेना ने की बड़ी मदद, समझें इनसाइड गेम | BMC Election Shiv Sena major support to Kirit Somaiya who slams Uddhav Thackeray know game hindi

मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनावी रण में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने सबको हैरान कर दिया है। शिवसेना (UBT) और उद्धव ठाकरे पर अपने तीखे बयानों के लिए मशहूर बीजेपी नेता किरीट सोमैया के बेटे, नील सोमैया के खिलाफ किसी भी बड़ी पार्टी ने उम्मीदवार नहीं उतारा है। वार्ड नंबर 107 (मुलुंड) से नील सोमैया बीजेपी के प्रत्याशी हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि उनके सामने ठाकरे गुट, कांग्रेस, मनसे या शरद पवार की एनसीपी का कोई भी योद्धा मैदान में नहीं है। इस अकल्पनीय स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए किरीट सोमैया ने सिर्फ इतना कहा— “गॉड इज ग्रेट!”

पूर्व सांसद सोमैया इसे ईश्वरीय कृपा मान रहे हैं, लेकिन राजनीतिक पंडित इसके पीछे के समीकरण सुलझाने में जुटे हैं। किरीट सोमैया लंबे समय से उद्धव ठाकरे और उनके खेमे के सबसे मुखर विरोधियों में गिने जाते रहे हैं। ऐसे में विपक्षी गठबंधन का उनके बेटे के खिलाफ सरेंडर कर देना चर्चा का केंद्र बना हुआ है।


विरोधी गायब, नील सोमैया की राह हुई आसान

मुलुंड के वार्ड नंबर 107 में नील सोमैया का दबदबा पहले से ही माना जाता रहा है। वे 2017 में भी यहाँ से पार्षद रह चुके हैं। इस बार स्थिति और भी अनुकूल हो गई है क्योंकि:

  • वार्ड 107 को छोड़कर मुलुंड के बाकी पाँचों वार्डों में सभी प्रमुख पार्टियां चुनाव लड़ रही हैं।
  • सिर्फ इसी सीट पर विपक्षी दलों की गैरमौजूदगी ने नील की राह को बेहद आसान बना दिया है।
  • लगातार ठाकरे परिवार पर हमलावर रहने वाले किरीट सोमैया के लिए यह एक बड़ी नैतिक जीत मानी जा रही है।

मुलुंड: बीजेपी का वो अभेद्य किला जिसे ढहाना मुश्किल है

मुलुंड को लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का गढ़ माना जाता है। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं:

  1. जनसांख्यिकीय समीकरण: यहाँ गुजराती और मारवाड़ी समुदाय की सघन आबादी है, जो पारंपरिक रूप से भाजपा का कोर वोटर रहा है।
  2. चुनावी इतिहास: विधानसभा हो या लोकसभा, मुलुंड हमेशा से भगवा खेमे के साथ खड़ा नजर आया है।
  3. विपक्ष की चूक: शरद पवार गुट (NCP) ने यहाँ से हंसराज दानानी को टिकट दिया था, लेकिन नामांकन के समय हलफनामा न लगाने की तकनीकी गलती के कारण चुनाव आयोग ने उनका पर्चा खारिज कर दिया।
  4. वर्तमान स्थिति: मुख्य विपक्षी का नामांकन रद्द होने के बाद अब मैदान में केवल ‘वंचित बहुजन अघाड़ी’ और 9 निर्दलीय उम्मीदवार बचे हैं, जो नील सोमैया के लिए बड़ी चुनौती नहीं माने जा रहे।

BMC चुनाव: 68 सीटों पर ‘निर्विरोध’ जीत और चुनाव आयोग का एक्शन

इस बार का बीएमसी चुनाव इतिहास रच रहा है। महायुति (BJP-शिवसेना-NCP गठबंधन) के 68 उम्मीदवार बिना मतदान के ही निर्विरोध जीत चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में निर्विरोध जीत ने चुनाव आयोग के कान खड़े कर दिए हैं।

आयोग ने अब इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए रिटर्निंग ऑफिसर को जाँच के आदेश दिए हैं। इस बात की गहराई से पड़ताल की जा रही है कि क्या विपक्षी या निर्दलीय उम्मीदवारों ने किसी दबाव, डर या प्रलोभन में आकर अपने नाम वापस लिए हैं। जब तक जाँच की अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक इन निर्विरोध जीतों के आधिकारिक ऐलान पर रोक लगा दी गई है।



Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है।Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *