जयपुर. शुक्रवार को सीएम कार्यालय में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई. कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसले लिए गए हैं. इसमें राजस्थान औद्योगिक विकास नीति को मंजूरी दे दी गई है. विशेष योग्यजन, कार्मिक-पेंशनभोगियों के कल्याण, ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि एवं औद्योगिक विकास के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। बैठक में वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान, मुख्यमंत्री विकसित ग्राम-शहरी वार्ड अभियान और प्रदेश में पेयजल एवं विद्युत आपूर्ति समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई.
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत और ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हीरालाल नागर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार द्वारा लिये गये फैसलों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि 4जी के चार रणनीतिक स्तंभों- ग्रीन, गवर्नेंस, ग्रोथ और ग्लोबलाइजेशन पर आधारित राजस्थान औद्योगिक विकास नीति का मुख्य लक्ष्य वर्ष 2028-29 तक राज्य की अर्थव्यवस्था को 350 बिलियन डॉलर तक ले जाना है। इस नीति के तहत राज्य में पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक उत्पादन, नवीकरणीय ऊर्जा और चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जायेगा।
रीको एवं गैर रीको क्षेत्रों में सीईटीपी स्थापित करने के लिए नई योजनाएं लाई जाएंगी।
उन्होंने कहा कि नीति के माध्यम से रीको एवं गैर-रीको क्षेत्रों में सीईटीपी स्थापित करने के लिए नई योजनाएं लाई जाएंगी तथा नए इंटीग्रेटेड रिसोर्स रिकवरी पार्क भी स्थापित किए जाएंगे। डीएमआईसी कॉरिडोर में नोड आधारित औद्योगिक पार्क के विकास का कार्य शुरू किया जाएगा। फास्ट ट्रैक मंजूरी, लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी, सीईटीपी और प्लग एंड प्ले सुविधाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
राज्य में विश्व स्तरीय औद्योगिक बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।
मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि नीति के माध्यम से राज्य में विश्व स्तरीय औद्योगिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाई जाएगी. एमएसएमई, ओडीओपी और निर्यात को अधिक प्रोत्साहन दिया जाएगा। सेमी कंडक्टर, डेटा सेंटर, जीसीसी जैसी नई तकनीकों पर आधारित उद्योग। रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने के साथ-साथ रत्न और आभूषण, कपड़ा, पर्यटन, हस्तशिल्प, कृषि प्रसंस्करण, डेयरी और रसद आदि को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। यह नीति अनुसंधान और विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर केंद्रित है, जिससे राज्य में निवेश और स्वदेशी उत्पादन में वृद्धि होगी।
पीसी:डीआईपीआर.राजस्थान
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