अनिल अंबानी फेमा समन पर डिजिटल माध्यम से पेश होने को तैयार, 15 साल पुराने मामले में प्रवर्तन निदेशालय को देंगे सहयोग
रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जारी समन के जवाब में शुक्रवार को “डिजिटल माध्यम” से पेश होने की पेशकश की है। 66 वर्षीय कारोबारी ने ईडी को लिखे पत्र में जांच में “पूर्ण सहयोग” का आश्वासन दिया है।
सूत्रों के अनुसार, ईडी ने अंबानी को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर फेमा के तहत अपना बयान दर्ज कराने को कहा था। यह जांच जयपुर-रींगस राजमार्ग परियोजना से जुड़ी है, जहां ईडी को लगभग 100 करोड़ रुपये की धनराशि के हवाला के माध्यम से विदेश भेजे जाने का संदेह है। ईडी ने कुछ कथित हवाला डीलरों सहित कई लोगों के बयान दर्ज करने के बाद अंबानी को तलब करने का निर्णय लिया। हवाला, धन की अवैध आवाजाही की प्रक्रिया है, जिसमें अक्सर नकदी का लेन-देन शामिल होता है।
यह उल्लेखनीय है कि ईडी ने पहले भी अनिल अंबानी से उनके समूह की कंपनियों के खिलाफ 17,000 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी से जुड़े धन शोधन मामले में पूछताछ की थी। अंबानी के प्रवक्ता द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि वर्तमान फेमा मामला 15 साल पुराना, 2010 का है और एक सड़क ठेकेदार से संबंधित है।
बयान में स्पष्ट किया गया है कि ‘रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’ ने 2010 में जेआर टोल रोड (जयपुर-रींगस राजमार्ग) के निर्माण के लिए एक ईपीसी अनुबंध प्रदान किया था। यह अनुबंध पूरी तरह से घरेलू था और इसमें किसी भी विदेशी मुद्रा का लेन-देन शामिल नहीं था। बयान के अनुसार, जेआर टोल रोड का निर्माण पूरा हो चुका है और यह 2021 से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकार क्षेत्र में है।
यह भी स्पष्ट किया गया है कि अनिल अंबानी रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के बोर्ड के सदस्य नहीं हैं। उन्होंने अप्रैल 2007 से मार्च 2022 तक लगभग 15 वर्षों तक कंपनी में केवल एक गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दीं और कभी भी कंपनी के दैनिक प्रबंधन में सक्रिय रूप से शामिल नहीं रहे।
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