घंटों की सिटिंग और पैरों में असहनीय दर्द? एक्सपर्ट से जानें नस दबने की असली वजह और पक्का समाधान

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घंटों की सिटिंग और पैरों में असहनीय दर्द? एक्सपर्ट से जानें नस दबने की असली वजह और पक्का समाधान!
Office Job में घंटों बैठना पड़ रहा भारी? Expert से जानें क्यों दब रही है पैर की नस

सावधान! कहीं आपकी लाइफस्टाइल पैरों की नसों को तो नहीं दबा रही?

आज की भागमभाग भरी जिंदगी में हम अपनी सेहत को नजरअंदाज करने लगे हैं। घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना, मोबाइल-लैपटॉप के चक्कर में झुककर रहना और शारीरिक सक्रियता की कमी अब एक आम समस्या बन गई है। इसका सीधा और गहरा प्रहार हमारी रीढ़ की हड्डी और नसों पर होता है। जब कमर या पैर की नसों पर लगातार दबाव पड़ता है, तो दिमाग और मांसपेशियों के बीच होने वाला संचार (सिग्नल) बाधित हो जाता है। इस स्थिति का नतीजा दर्द, सुन्नता और कमजोरी के रूप में सामने आता है, जो अक्सर कमर से शुरू होकर पैरों तक पहुंच जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि ‘पैर की नस दबने’ की यह समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ऑफिस जाने वाले युवा और खिलाड़ी भी इसका शिकार हो रहे हैं। चूंकि इसके लक्षण बहुत धीरे-धीरे उभरते हैं, इसलिए लोग अक्सर इसे पहचानने में देरी कर देते हैं।

आइए जानते हैं, आखिर पैर की नस दबने के पीछे मुख्य कारण क्या हैं:

1. स्लिप डिस्क या हर्नियेटेड डिस्क का खतरा
पैरों की नसों में दबाव का सबसे बड़ा कारण अक्सर ‘स्लिप डिस्क’ होता है। जब रीढ़ की हड्डी के बीच मौजूद डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है, तो वह आसपास की नसों को दबाने लगती है। इसे ‘साइटिका’ भी कहा जाता है, जिसमें तेज दर्द कमर से होता हुआ सीधे पैरों तक उतरता है।

2. स्पाइनल स्टेनोसिस और बोन स्पर
उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई बदलाव आते हैं। कुछ लोगों में रीढ़ की हड्डी की नलिका सिकुड़ने लगती है, जिसे ‘स्पाइनल स्टेनोसिस’ कहते हैं। इसके अलावा, हड्डियों पर अतिरिक्त उभार यानी ‘बोन स्पर’ भी बन सकते हैं। ये दोनों स्थितियाँ नसों के लिए जगह कम कर देती हैं, जिससे पैरों में दबाव, दर्द और चलते समय सुन्नपन महसूस होने लगता है।

3. पुरानी चोट या एक्सीडेंट का प्रभाव
किसी दुर्घटना, गिरने या खेल के दौरान लगी चोट शरीर के भीतर सूजन या आंतरिक क्षति पैदा कर सकती है। कई बार बाहरी जख्म तो भर जाते हैं, लेकिन अंदरूनी सूजन नसों पर दबाव बनाए रखती है। यही वजह है कि चोट लगने के काफी समय बाद भी पैरों में झनझनाहट, कमजोरी या दर्द बना रह सकता है।

4. टाइट मसल्स (मांसपेशियों का कड़ापन)
नस दबने का कारण केवल हड्डियां ही नहीं, बल्कि सख्त मांसपेशियां भी हो सकती हैं। खासकर कूल्हों और जांघों की मांसपेशियां यदि बहुत ज्यादा टाइट हो जाएं, तो वे नसों को जकड़ लेती हैं। ‘पिरिफॉर्मिस सिंड्रोम’ इसका एक बड़ा उदाहरण है, जिसमें मांसपेशियों के खिंचाव के कारण दर्द पूरे पैर में फैल जाता है।

5. गलत पोश्चर और सिटिंग जॉब
ऑफिस में घंटों गलत तरीके से बैठना या आगे की ओर झुककर काम करना आपकी रीढ़ के लिए दुश्मन साबित हो सकता है। बिना ब्रेक लिए लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने से रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। यही खराब पोश्चर धीरे-धीरे नसों को दबाने लगता है, जो आगे चलकर गंभीर दर्द और शारीरिक कमजोरी का रूप ले लेता है।


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