टेस्ट क्रिकेट का ‘कैंसर’: सैमी का गंभीर खुलासा, व्यवस्था में गहरी जड़ें जमा चुकी हैं समस्याएँ
पूर्व कप्तान डेरेन सैमी ने वेस्टइंडीज में टेस्ट क्रिकेट के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे व्यवस्था में गहरे बैठे ‘कैंसर’ का परिणाम बताया है। दो बार के टी20 विश्व कप विजेता कप्तान का मानना है कि युवा पीढ़ी के पास छोटे प्रारूपों में कई प्रेरणास्रोत हैं, जो केवल संसाधनों की उपलब्धता पर ही अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकते हैं।
जब उनसे वेस्टइंडीज में टेस्ट क्रिकेट की समस्याओं और उनकी व्यक्तिगत भावनाओं के बारे में पूछा गया, तो सैमी ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने कहा, “आखिरी बार हमने यहां टेस्ट श्रृंखला 1983 में जीती थी, जब मैं पैदा हुआ था।” यह आंकड़ा वेस्टइंडीज के टेस्ट क्रिकेट में पिछले 42 वर्षों की निराशाजनक स्थिति को उजागर करता है, विशेष रूप से भारत में।
सैमी ने स्वीकार किया कि उन पर और टीम पर निश्चित रूप से दबाव होगा, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समस्या कोई नई नहीं है। “हमें आलोचना से कोई परहेज़ नहीं है, लेकिन समस्या की जड़ दो साल पुरानी नहीं है। यह बहुत पहले शुरू हो गया था।”
उन्होंने इस गंभीर समस्या की तुलना एक ऐसे ‘कैंसर’ से की, जो व्यवस्था में गहराई से समा चुका है। सैमी ने स्तन कैंसर जागरूकता माह का उदाहरण देते हुए कहा, “यह कैंसर की तरह है जो व्यवस्था में पहले से था। अगर आपको कैंसर नहीं होता, तो आपको पता है कि क्या होता है। यह स्तन कैंसर जागरूकता का महीना है। तो इसे कहने का यह एक अच्छा तरीका है। कि हमारी समस्यायें सतह पर नहीं हैं। ये हमारी व्यवस्था में गहराई से जड़ें जमा चुकी हैं।”
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