नोबेल शांति पुरस्कार की दौड़ में ट्रंप: ‘युद्ध रोकने की हैट्रिक’ पर क्या मिलेगा सम्मान?
डोनाल्ड ट्रंप, जो अक्सर खुद को दुनिया के सबसे बड़े शांतिदूत के रूप में पेश करते हैं, एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार की कतार में खड़े हैं। उनका दावा है कि उन्होंने सात युद्धों पर विराम लगाया है और अब वे आठवें युद्ध, यानी गाजा संघर्ष को समाप्त करने के बहुत करीब हैं। इजरायल और हमास दोनों ने ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना को स्वीकार कर लिया है, जिससे इस बार नोबेल समिति पर दबाव बढ़ सकता है।
ट्रंप ने खुले तौर पर कहा है कि वे इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के हकदार हैं, क्योंकि उनके कार्यकाल में ऐसे शांति समझौते हुए हैं जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। वह खुद को आर्मेनिया, अजरबैजान, कांगो और रवांडा जैसे देशों में संघर्षों के समाधान का श्रेय देते हैं। यहां तक कि उन्होंने मई में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने में अपनी भूमिका का भी दावा किया था, जिसे भारत सरकार ने तब सिरे से खारिज कर दिया था।
क्या मिलेगा इस बार नोबेल?
ट्रंप इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि उन्हें यह पुरस्कार मिलेगा या नहीं। व्हाइट हाउस में एक पत्रकार के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “मुझे कोई अंदाजा नहीं। मार्को आपको बताएगा कि हमने सात युद्ध समाप्त किए हैं। हम आठवें युद्ध को सुलझाने के करीब हैं। मुझे लगता है कि हम रूस-यूक्रेन मुद्दे को भी सुलझा लेंगे। इतिहास में किसी ने भी इतने संघर्ष समाप्त नहीं किए। लेकिन शायद वे मुझे यह पुरस्कार देने का कोई कारण नहीं ढूंढ पाएंगे।”
उन्होंने इस ओर भी इशारा किया कि नोबेल समिति उन्हें पुरस्कार से वंचित रखने के लिए कोई न कोई बहाना जरूर खोजेगी।
नोबेल शांति पुरस्कार: कैसे होता है चयन?
नोबेल शांति पुरस्कार का चयन नॉर्वे की संसद द्वारा नियुक्त एक समिति द्वारा किया जाता है। यह स्वीडन द्वारा दिए जाने वाले अन्य नोबेल पुरस्कारों से अलग प्रक्रिया है। यह दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान उन व्यक्तियों या संगठनों को दिया जाता है जिन्होंने वैश्विक शांति, राष्ट्रों के बीच भाईचारा और निरस्त्रीकरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो।
इस साल के नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में की जाएगी। ट्रंप को उनके पहले कार्यकाल में भी नामांकित किया गया था, लेकिन वे तब भी यह पुरस्कार जीतने में सफल नहीं हुए थे। 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार ऐसे समय में आ रहा है जब गाजा संघर्ष पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान फिर से केंद्रित है। पुरस्कार की घोषणा में कुछ ही घंटे शेष हैं, और सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप को उनकी ‘शांति की विरासत’ के लिए यह सम्मान मिलेगा।
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