ट्रंप होंगे हैरान, मोदी-पुतिन की भारत में मुलाकात तय!

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ट्रंप होंगे हैरान, मोदी-पुतिन की भारत में मुलाकात तय!
ट्रंप को लगेगी मिर्ची! पुतिन के भारत दौरे की आ गई तारीख, पीएम मोदी से होगी बड़ी बातचीत

नई दिल्ली में पुतिन का आगमन: भारत-रूस संबंधों में एक नया अध्याय?

5-6 दिसंबर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की संभावित भारत यात्रा, फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष के शुरू होने के बाद उनकी पहली नई दिल्ली यात्रा होगी। क्रेमलिन द्वारा मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण को स्वीकार करने की पुष्टि के बाद, यह यात्रा वैश्विक मंच पर भारत की बदलती कूटनीतिक स्थिति को रेखांकित करती है।

बदलती भू-राजनीतिक धाराएं और भारत का बढ़ता महत्व

पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका के साथ भारत के संबंध तनावपूर्ण हैं, वहीं रूस और चीन के साथ उसके संबंध और मजबूत हुए हैं। यह स्थिति भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करती है, जो विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलन साधने में सक्षम है।

अमेरिका का दबाव और भारत का दृढ़ रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस के साथ व्यापार को लेकर भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला, और मास्को से कच्चे तेल की खरीद के ज़रिए यूक्रेन युद्ध को अप्रत्यक्ष रूप से वित्तपोषित करने का आरोप, भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। अमेरिकी अधिकारियों की नई दिल्ली को चेतावनी, "अगर वह अमेरिकी उपभोक्ताओं को सामान बेचना चाहता है, तो उसे राष्ट्रपति के साथ तालमेल बिठाना होगा," भारत की संप्रभुता पर हस्तक्षेप के रूप में देखी जा रही है।

भारत का जवाबी प्रहार: पाखंड और अनुचितता का आरोप

भारत सरकार ने वाशिंगटन के रुख को "पाखंडी और अनुचित" बताते हुए कड़ी निंदा की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कच्चे तेल का आयात "बाजार की चिंताओं" से प्रेरित है और देश के हितों को सर्वोपरि रखा जाता है। भारत ने पश्चिमी देशों पर "दोहरे मापदंड" अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि यूरोप की कुछ अर्थव्यवस्थाएं सहित अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं रूस के साथ व्यापार जारी रखे हुए हैं।

तेल कूटनीति: प्रतिबंधों के बावजूद जारी

अमेरिकी दबाव के बावजूद, भारत ने मास्को के साथ अपने तेल व्यापार को रोकने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद से, भारत कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार बनकर उभरा है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

निष्कर्ष

पुतिन की भारत यात्रा, भारत की स्वतंत्र विदेश नीति, मजबूत कूटनीतिक कौशल और वैश्विक मंच पर बढ़ती भूमिका का प्रतीक है। यह यात्रा भारत-रूस संबंधों को नए आयाम देने के साथ-साथ, भारत को एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।


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