छतरपुर के एक आदिवासी गांव में प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को दो किलोमीटर तक कीचड़ में खाट उठानी पड़ी। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी, जबकि सड़क निर्माण की फाइल वर्षों से सरकारी दफ्तरों में लंबित बताई जा रही है।
प्रसव पीड़ा के बीच शुरू हुआ मुश्किल सफर
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से सामने आया एक वीडियो ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 30 वर्षीय गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद अस्पताल ले जाना था, लेकिन बारिश ने गांव का रास्ता इस कदर खराब कर दिया कि एंबुलेंस घर तक नहीं पहुंच सकी।
तीन घंटे इंतजार, फिर खाट बनी सहारा
परिजनों ने सरकारी जननी एक्सप्रेस के लिए संपर्क किया। बताया गया कि करीब तीन घंटे इंतजार के बावजूद वाहन गांव तक नहीं आ सका। महिला की हालत बिगड़ती देख परिवार ने प्रशासन और स्थानीय विधायक से भी मदद मांगी। जब तत्काल वाहन नहीं पहुंचा, तो ग्रामीणों ने महिला को खाट पर लिटाया और कीचड़ भरे रास्ते पर पैदल निकल पड़े।
करीब दो किलोमीटर का यह सफर किसी परीक्षा से कम नहीं था। ग्रामीण खाट को कंधों पर उठाकर मुख्य मार्ग तक पहुंचे। इसके बाद निजी वाहन की मदद से महिला को अस्पताल ले जाया गया।
बारिश ने खोल दी सड़क की हकीकत
मामला बक्सवाहा विकासखंड की ग्राम पंचायत निमानी के मझरा टोला पडसिला का बताया गया है। यहां करीब 8 से 10 आदिवासी परिवार रहते हैं। सामान्य दिनों में यही रास्ता गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ता है, लेकिन बारिश होते ही करीब दो किलोमीटर का रास्ता दलदल में बदल जाता है।
ऐसे हालात में गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए अस्पताल तक पहुंचना खास तौर पर मुश्किल हो जाता है।
2022 में बनी थी सड़क की फाइल
ग्राम पंचायत सचिव महेश शुक्ला के अनुसार, मझरा टोला पडसिला में सड़क निर्माण के लिए 2022 में फाइल जमा की गई थी, लेकिन अब तक सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। सवाल यही है कि अगर वर्षों पहले समस्या सामने आ चुकी थी, तो समाधान अब तक क्यों नहीं हुआ?
वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन सक्रिय
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हलचल मची। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। अब जांच में यह देखना अहम होगा कि एंबुलेंस गांव तक क्यों नहीं पहुंच सकी और सड़क की समस्या वर्षों से लंबित क्यों है।
एक खाट, कई सवाल
यह घटना केवल एक परिवार की परेशानी नहीं है। यह उन दूरदराज इलाकों की तस्वीर सामने लाती है, जहां सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव आपात स्थिति को जानलेवा बना सकता है। विकास का असली पैमाना कागजों पर दर्ज योजनाएं नहीं, बल्कि वह रास्ता है जो जरूरत की घड़ी में मरीज को सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचा सके।
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